किसान नेता सुरेंद्र शर्मा व मोहन लोहरा ने फसल आबियाना पर कहा कि सिंचाई विभाग ने मनमाने ढंग से जो नोटिस निकाले हैं। जिसमें 50-50 हजार रुपए आबियाना बकाया दिखाकर, उस पर लाखों के ब्याज की मांग रखी है। इसे किसान सभा बिल्कुल बर्दाशत नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही प्रकृति की मार व लगातार नहरबंदी की मार से त्रस्त हंै, उपर से विभाग के अधिकारी किसानों पर लाखों का ब्याज लगाकर किसानी छोडऩे पर मजबूर कर रहे हैं। किसान सभा आगे 10 अप्रेल को सिंचाई विभाग पर प्रदर्शन करेगी।
किसानों के उक्त आंदोलन को सफल बनाने के लिए दस कमेटियां बनाई गई है। जो गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेगी। कमेटी प्रभारियों में पीलीबंगा गोपाल बिश्नोई, चरणजीत बराड़, अनिल चौधरी, जसवंत जाखड़ के नेतृत्व में गांव-गांव में जाएगी। हनुमानगढ़ से सुरेन्द्र शर्मा, मोहन लोहरा, जगजीत सिंह जग्गी, राजेन्द्र मरोडिय़ा, भाखड़ा क्षेत्र से ओम स्वामी, गुरदेव ज्याणी, बयंत सिंह, वेद मक्कासर, रमनदीप, मदन आदि को नियुक्त किया गया। किसान सभा के ओम स्वामी ने कहा कि मंडी में जब भी सरसों आती है सरकार का हर बार एक ही तरह का रवैया रहता है। तीन साल पहले इसके खिलाफ किसान सभा ने आंदोलन किया। आखिरकार 10 से 15 प्रतिशत तक सरसों की एमएसपी खरीद करवाने में किसान सभा कामयाब रही। इसके बाद दो साल खरीद की गई लेकिन खरीद केन्द्र धानमंडी से दूर बना दिया। जबकि धानमंडी में शैड के नीचे ही सरसों की खरीद की जानी चाहिए ताकि किसानों की उपज खराब न हो।
किसान नेताओं ने कहा कि सरकार दस अप्रैल से सरसों की सरकारी खरीद शुरू करने की बात कह रही है लेकिन खरीद के लिए अपनाई जा रही ढीली प्रक्रिया से दस अप्रैल से खरीद शुरू होने की संभावना नहीं लग रही है। जब तक खरीद शुरू होगी तब तक किसान 90 प्रतिशत सरसों निजी हाथों में बेच चुका होगा। उन्होंने मंडी में पहुंच चुकी सरसों की खरीद एमएसपी पर करने की मांग सरकार से की। साथ ही मंडी में आने वाली गेहूं की खरीद भी जल्द शुरू करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सरसों-गेहूं की सरकारी खरीद शुरू नहीं होती है तो धानमंडी में आंदोलन किया जाएगा। किसान नेताओं ने सरसों की सरकारी खरीद में की जा रही देरी पर रोष जताया।