पीड़ित युवती पुणे के एक अस्पताल में काउंसलर के रूप में काम करती है। घटना के दिन वह फलटण स्थित अपने घर जाने के लिए स्वारगेट बस डिपो पहुंची थी। वह डिपो के पास केंद्र के पास अपने बस का इंतजार कर रही थी, तभी आरोपी दत्तात्रय गाडे उसके पास आया और बातचीत करने लगा। आरोपी ने उसे यह कहते हुए गुमराह किया कि उसकी बस थोड़ी दूर दूसरी जगह खड़ी है। युवती ने पहले संदेह जताया और कहा कि उसकी बस यहीं से मिलती है, लेकिन आरोपी ने उसे भरोसा दिलाया कि बस कुछ ही देर में रवाना होगी, इसलिए उसे जल्दी जाना चाहिए।
CCTV में कैद हुआ आरोपी-
इसके बाद आरोपी युवती को 30-40 मीटर दूर खड़ी एक बंद शिवशाही बस के पास ले गया। युवती को अंधेरे में खड़ी बस को देखकर शक हुआ और उसने सवाल किया कि बस की लाइट बंद क्यों है? इस पर आरोपी ने झूठ बोला कि रातभर की यात्रा के कारण यात्री सो रहे हैं, इसलिए लाइट बंद रखी गई है। उसने युवती को बस के अंदर जाने के लिए कहा और जैसे ही वह अंदर गई, आरोपी भी उसके पीछे-पीछे घुस आया और बस का दरवाजा बंद कर लिया। इसके बाद उसने युवती के साथ जबरदस्ती की। वारदात के बाद आरोपी ने उसे धमकाया कि अगर उसने किसी को बताया तो जान से मार देगा, और फिर वहां से फरार हो गया। डिपो में लगे सीसीटीवी फुटेज में आरोपी दत्तात्रय युवती के आसपास मंडराता हुआ नजर आया। पुलिस की 8 टीमें उसकी तलाश कर रहीं हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की होगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार हरकत में आई। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए स्वारगेट डिपो में तैनात 23 सुरक्षा रक्षकों को निलंबित करने का आदेश दिया। इसके अलावा, ड्यूटी पर मौजूद डिपो प्रमुख (सहायक परिवहन अधीक्षक) और डिपो प्रबंधक की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। अगर वे दोषी पाए गए, तो उन्हें भी तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया है।
एसटी की कल अहम बैठक
साथ ही परिवहन मंत्री ने महिला यात्रियों की सुरक्षा की समीक्षा के लिए गुरुवार को महाराष्ट्र राज्य परिवहन (MSRTC) के सभी वरिष्ठ अधिकारियों की तत्काल बैठक बुलाने का भी निर्देश दिया है। इस बैठक में सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार से स्वारगेट बस डिपो पर नये सुरक्षा गार्डों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा स्वारगेट डिपो मैनेजर और ट्रैफिक कंट्रोलर की जांच की जाएगी और एक सप्ताह के भीतर इसकी रिपोर्ट सौंपी जाएगी। यह रिपोर्ट परिवहन आयुक्त को सौंपने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।