CG News: स्कूली बच्चों को रस्मी तौर पर बांट रहे पावर वाले चश्मे, कुछ दिन पहनने के बाद टूट जाती है फ्रेम
CG News: पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि स्कूली बच्चों को ये चश्मे रस्मी तौर पर बांटे जा रहे हैं। चूंकि सारे बच्चे सरकारी स्कूलों के होते हैं, इसलिए उनकी क्वालिटी पर ध्यान नहीं दिया जाता।
CG News: स्कूली बच्चों को फ्री में चश्मे बांटने का नियम है, ताकि वे पढ़ाई ठीक से कर सके। ये चश्मे पावर वाले होते हैं, लेकिन बल्क में ऑर्डर देने के कारण अक्सर गलत पावर के चश्मे बांट दिए जाते हैं। इससे बच्चों को पहनने में दिक्कत होती है। यही नहीं, फ्रेम भी घटिया होती है, जो कुछ दिनों में टूट जाती है। फ्रेम बड़ी होने के कारण बच्चे चश्मा पहनने से हिचकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य साइज व फैंसी चश्मा बांटने से बच्चे इसे आसानी से पहनने लगेंगे। स्कूली बच्चों यानी कक्षा एक से 12वीं तक के छात्रों को चश्मा बांटा जाता है। इसके लिए कैंप लगाया जाता है या स्कूलों में जाकर टीम आंखों की जांच करती है। चूंकि बच्चों की उम्र 5 से 17 या 18 साल की होती है इसलिए उन्हें दूर की चीजें देखने के लिए पावर वाले चश्मे की जरूरत पड़ती है।
पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि स्कूली बच्चों को ये चश्मे रस्मी तौर पर बांटे जा रहे हैं। चूंकि सारे बच्चे सरकारी स्कूलों के होते हैं, इसलिए उनकी क्वालिटी पर ध्यान नहीं दिया जाता। टेंडर में सबसे कम रेट भरने वाले वेंडर को चश्मा बनाने का ऑर्डर दिया जाता है।
दाेनों आंखों का नंबर माइनस पाॅइंट 5, दे दिया गलत नंबर
CG News: पत्रिका के पास नेत्र सहायक अधिकारी की एक वॉट्सऐप चैटिंग है, जिसे एक उच्चाधिकारी को भेजा गया है। यह मार्च 2022 का है और रायपुर जिले का है। इसमें कहा है कि स्कूली चश्मा का पावर गलत है, कृपया चेक करने के बाद ही देवें। दोनों आंखों का नंबर माइनस दशमलव 5 है, उसमें दायीं आंख का सही है, लेकिन बायीं आंख का माइनस पाॅइंट दो दिया गया है।
ये गलती एक नहीं, बल्कि सभी चश्मों के पावर में की गई है। आगे उन्होंने लिखा है कि एक भी चश्मे ही पावर के नहीं है, सभी चश्मे वापसी योग्य है। समय मिलते ही सबको मिलाकर पूरा भेजता हूं शाम तक। रिटर्न कर दीजिएगा सर। ये केवल बानगी है। ज्यादातर स्कूलों में भेजे गए चश्मे में ये समस्या देखी गई है।
डॉ. सुभाष मिश्रा, रिटायर्ड स्टेट नोडल अफसर अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम: स्कूली बच्चों व बड़ों को निर्धारित नंबर का चश्मा दिया जाना चाहिए। गलत नंबर का चश्मा पहनने से सिरदर्द व आंखों में तनाव होता है। सही पावर का चश्मा बांटने का नियम राष्ट्रीय कार्यक्रम में है।
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