CG News: वाष्पीकरण की प्रक्रिया लगातार
बता दें कि गर्मियों के आते ही मिट्टी से बने मटकों की मांग बढ़ रही है।
बस्तर में इस मिट्टी से बने हुए मटकों की बिक्री जमकर हो रही है। यहां आसपास के गांव से कुम्हारा मटके बनाकर शहर के बाजार में लाकर बेच रहे हैं। गुरुवार को देवड़ा गांव से वाहनों में लाकर इन मटकों को बेचा जा रहा था। इन मटकों के दाम फिलहाल 100 रुपए से अधिक हैं। जानकारों ने बताया कि मिट्टी से बने इन घड़ों के पोर या रंध्र की वजह से वाष्पीकरण की प्रक्रिया लगातार होती रहती है, जिससे पानी ठंडा रहता है।
मटका बनाने की प्रक्रिया
CG News: बसे पहले मिट्टी को लाया जाता है और उसे पानी में भिगोकर नरम किया जाता है। फिर इसे अच्छी तरह छाना जाता है ताकि कोई कंकड़ या गंदगी न रहे। जब मिट्टी सही रूप से तैयार हो जाती है, तब उससे मटके, सुराहियां और अन्य मिट्टी के बर्तन बनाए जाते हैं। इसके बाद इन्हें पकाने के लिए भट्टी में रखा जाता है। मटके तैयार होने के बाद इन्हें बाजारों में थोक रेट पर बेचा जाता है। इन मटकों की सप्लाई अंबिकापुर, बिलासपुर, रायपुर, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसी जगहों पर भी होती है।
फोटो- ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी