CG Fraud Case: भ्रष्टाचार का पूरा खेल
पत्रिका ने जब इस पूरे मामले के दस्तावेज खंगाले तो पता चला कि गांवों के सरपंचों के फर्जी हस्ताक्षर से राशि निकाली गई है। दरअसल 15वें वित्त की राशि सरपंचों के
डिजिटल हस्ताक्षर के बगैर नहीं निकाली जा सकती। इसी बात का पंचायत संचिवों ने फायदा उठाया। पंचायत चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले सचिवों ने सरपंचों के डिजिटल साइन जमा करवा लिए और उसी दौरान भ्रष्टाचार का पूरा खेल खेला गया। दरअसल सचिवों ने सरपंचों को जानकारी दिए बगैर उनके डिजिटल हस्ताक्षर से राशि आहरित की।
पूरा प्रकरण फर्जीवाड़े के नींव पर खड़ा हुआ
काम करवाए बगैर राशि निकालने का काम डिजिटल साइन के जरिए किया गया। 15 वें वित्त का भुगतान फर्जी बिल और अमान्य फोटो लगाकर कर किया गया। इस पूरे मामले में चौंकाने वाला एक तथ्य यह भी है कि दर्जनभर कामों का वेंडर एक ही व्यक्ति था। उसी व्यक्ति के फर्म को सारे भुगतान किए गए। जिस फर्म ने कभी मरम्मत काम काम नहीं किया या परिवहन काम काम नहीं किया उसे भुगतान किया गया। यह पूरा प्रकरण फर्जीवाड़े के नींव पर खड़ा हुआ है। बड़ेकालेड सरपंच बोली बिना काम के पैसे का आहरण किया गया
बड़ेकालेड सरपंच इल्लुबाई गोटा ने बताया कि मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं मेरा डीएससी हमेशा सचिव के पास रहता है। मेरे डीएससी का गलत इस्तेमाल कर पैसे निकाले गए हैं। मेरे पंचायत में कोई आंगनबाड़ी भवन नहीं है। आंगनबाड़ी घरों में लगाते हैं। ऐसे में मरम्मत करने का कोई सवाल ही नहीं हैं। सचिव ने बिना काम के पैसा निकाला है।
लगातार गलत तरीके से पैसे निकाले गए
पत्रिका ने पड़ताल के दौरान एडापल्ली सरपंच सुकना कावरे से बात की। उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले सचिव ने मेरा डीएससी जनपद कार्यालय में जमा करना है कहकर ले लिया था। मेरे डीएससी से राशि निकाली गई है इसकी मुझे कोई जनाकारी नही है। एडापल्ली पंचायत में आंगनबाड़ी नहीं हैं तो मरम्मत कैसे होगी। इसी तरह अन्य काम के भी पैसे निकाले जाने की जानकारी मुझे अब मिल रही है। अधिकारियों ने भी जांच की जहमत नहीं उठाई
CG Fraud Case:
पंचायत सचिवों और जनपद के अधिकारियों ने अपने चहेते सप्लायर के नाम पर नियम विरुद्ध पैसे जारी किए। हैरानी की बात है कि जिम्मेदारों ने फर्जी बिल, अमान्य फोटो वाले बिलों की जांच तक नहीं की। लाखों रुपए का बिल पास कर भुगतान कर दिए। एक ही वेंडर सारे काम कर रहा है यहीं से संदेह पैदा होता है। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने इस पर सवाल नहीं उठाया। इससे स्पष्ट है कि पंचायत सचिवों के साथ ही अन्य जिम्मेदार अधिकारी भी इस पूरे मामले में लिप्त हैं।