इस बजट सम्मेलन में भोजन अवकाश के बाद निगम के महत्वपूर्ण संपत्ति और जल टैक्स वृद्धि समेत सात प्रस्तावों पर विचार-विमर्श होना था। निगम सचिव इसका प्रस्ताव पढ़ भी नहीं पाए थे और भाजपा पार्षद दिवाकर सदारंग के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों ने एक साथ प्रस्ताव पारित करने की घोषणा कर दी। प्रस्ताव पर चर्चा न होने से इसके मिनिट्स कागज पर नहीं आ पाए। इससे ये सभी प्रस्ताव पारित हो पाए या नहीं,ये भी बहस का विषय बना हुआ है। इस पर निगम सचिव कमलेश निरगुडकऱ की स्पष्ट राय भी सामने नहीं आई है। इसके मिनिट्स जारी न होने से निगम आयुक्त भी एक अप्रेल से टैक्स वृद्धि समेत कोई भी प्रस्ताव लागू नहीं कर पाए।
महापौर ने निगम अध्यक्ष से मांगे मिनिट्स
महापौर विक्रम अहके ने नगर निगम अध्यक्ष धर्मेन्द्र सोनू मागो को अर्धशासकीय पत्र लिखा है। महापौर ने कहा कि 28 मार्च को निगम परिषद की बैठक में सभी बिन्दुओं को बहुमत से पारित किया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष प्रारंभ हो चुका है। नगर निगम का कार्य प्रभावित न हो,इसके लिए आवश्यक है परिषद की बैठक के कार्यवृत्त यथाशीघ्र जारी किए जाए। इससे निगम के सभी कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
कलेक्टर-कमिश्नर से मिले निगम अध्यक्ष मागो व
पार्षद, कहा-दिवाकर ने नियम विरूद्ध उठाए कदम
बीती 28 मार्च को नगर निगम के बजट सम्मेलन में नियम विरूद्ध तरीके से प्रस्ताव पारित करने के मामले को लेकर निगम अध्यक्ष धर्मेन्द्र सोनू मागो और कांग्रेस पार्षदों का दल कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह और निगम आयुक्त सीपी राय से मिला और कार्यवाही की मांग की। निगम अध्यक्ष ने कहा कि बजट सम्मेलन में सक्षम प्राधिकृत प्राधिकारी निगम सचिव कमलेश निरगुडकऱ ने सभाकक्ष में उपस्थित सत्तापक्ष एवं प्रतिपक्ष के प्रतिनिधियों के समक्ष मात्र दो प्रस्तावों की ही उद्घोषणा व विमर्श कराया गया। शेष सात प्रस्ताव को सत्ता पक्ष ने उपस्थित जन प्रतिनिधियों के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत नहीं किया। निगम सचिव के बजाय निगम सत्तापक्ष के ही पार्षद दिवाकर सदारंग ने विधिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया। विशेष सम्मेलन में रखे जाने वाले सभी नौ प्रस्तावों को बहुमत के आधार पर पारित कर दिया। सभाकक्ष से सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों / पार्षदो से वाकआउट करने की घोषणा की। इससे विशेष सम्मेलन के संचालन की विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है। निर्धन वर्गो पर अधिरोपित कर वृद्धि जैसे संवेदनशील जनहित के विषयों पर परिचर्चा नहीं हो सकी। जिसका दुष्प्रभाव निर्धन जनों पर पडऩे की प्रबल संभावनाएं हैं। सम्मेलन के नैतिक शिष्टाचार एवं गरिमा धूमिल हुई है। जिससे प्रतिपक्ष के जनप्रतिनिधियों की भावनाएं कर वृद्धि अधिरोपित के संबंध में परिचर्चा/विचार विमर्श न कराने से आहत हुई है।उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष ने संविधिक दायित्वों की घोर उपेक्षा की। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-डब्ल्यू का स्पष्ट उल्लंघन भी है। इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष हंसा अंबर दाढ़े, सरला सिसोदिया, सरिता काले, श्रद्धा पटेल, मंजू बैस, तरूण कराड़े, संगीता पवार और राहुल मालवी उपस्थित हुए।
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इनका कहना
निगम अध्यक्ष से मिनिट्स न मिलने पर निगम की टैक्स वृद्धि लागू नहीं होगी। इसके साथ ही कर्मचारियों की तनख्वाह और विकास कार्य अवरूद्ध होंगे। इसके लिए उनसे मिनिट्स देने का अनुरोध किया गया है। इसका समाधान न होने पर शासन से मार्गदर्शन मांगा जाएगा या फिर कोर्ट की शरण ली जा सकती है।-विक्रम अहके, महापौर।
ये मामला महापौर का नहीं बल्कि निगम सचिव का है। उनकी ओर से मेरे समक्ष अब तक मिनिट्स हस्ताक्षर के लिए पेश नहीं किए गए है। बजट सम्मेलन में टैक्स वृद्धि समेत अन्य प्रस्तावों को पढ़े बिना उसे पारित करना विधिक नियमों का उल्लंघन है। इसका जवाब दिया जाना चाहिए।
-धर्मेन्द्र सोनू मागो, अध्यक्ष नगर निगम।
महापौर की ओर से निगम अध्यक्ष को बजट सम्मेलन के मिनिट्स दिए जाने का अनुरोध किया गया है। यहीं अनुरोध मेरी ओर से निगम सचिव से किया गया है। तभी आगे की प्रक्रिया सुनिश्चित होगी।
-सीपी राय, आयुक्त