मानसिंह पटेल की गुमशुदगी के मामले में जांच के लिए कोर्ट के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने केस में खात्मा रिपोर्ट लगाई जिसको चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी। सुनवाई के बाद शीर्ष कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच से भी इंकार कर दिया है।
कपिल सिब्बल सहित अन्य वरिष्ठ वकीलों ने दलीलें दीं
सुप्रीम कोर्ट ने खात्मा रिपोर्ट पर याचिकाकर्ताओं को सागर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में ही अपनी बात रखने को निर्देशित किया। याचिकाकर्ताओं सागर निवासी विनय मलैया और राजकुमार सिंह की ओर से कपिल सिब्बल सहित अन्य वरिष्ठ वकीलों ने दलीलें दीं जबकि अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल केएम नटराज ने सरकारी पक्ष रखा।
याचिकाकर्ताओं ने अलग-अलग याचिकाओं में एसआईटी की गठन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। एसआईटी की खात्मा रिपोर्ट को भी चुनौती देते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।
झूठी शिकायत करने और मामले को जबरदस्ती तूल देने के आरोप
बता दें कि इस मामले में गुमशुदा मानसिंह के बेटे सीताराम भी याचिकाकर्ताओं विनय मलैया और राजकुमार सिंह के विरोध में हैं। वे दोनों पर झूठी शिकायत करने और मामले को जबरदस्ती तूल देने के आरोप लगा चुके हैं।