फर्जीवाड़े का खुलासा, अधिकारी भी लपेटे में
मूल रूप से आगरा की फर्म परमार कंस्ट्रक्शन ने अक्टूबर 2020 में बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड में टेंडर दाखिल किया था। फर्म ने आगरा विकास प्राधिकरण के अनुभव प्रमाणपत्र लगाए, जिनकी सच्चाई संदेहास्पद थी। उसी समय तत्कालीन सीईओ अभिषेक आनंद द्वारा फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। बावजूद इसके, वर्ष 2023 में बरेली नगर निगम ने फर्म को फिर से 5.28 करोड़ रुपये का ठेका दे दिया।टेंडर कमेटी की भूमिका पर सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि टेंडर कमेटी ने दस्तावेजों की ठीक से जांच नहीं की और न ही फर्म के ब्लैकलिस्टेड होने की पुष्टि की। तीन सदस्यीय कमेटी की लापरवाही पर अब सवाल उठ रहे हैं और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।कई टेंडरों पर मंडरा रहा खतरा
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम अब फर्म द्वारा डाले गए अन्य टेंडरों की भी समीक्षा करने की तैयारी में है। यह भी जांच की जा रही है कि किन-किन अधिकारियों की मिलीभगत से फर्म को इतने बड़े टेंडर दिए गए। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि परमार कंस्ट्रक्शन की कौन-कौन सी सहयोगी फर्में अन्य टेंडरों में शामिल रही हैं।नोटिस जारी, जल्द होगी बड़ी कार्रवाई
फिलहाल नगर आयुक्त ने परमार कंस्ट्रक्शन को नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में जवाब मांगा है। तय समयसीमा में जवाब न मिलने की स्थिति में न केवल फर्म पर, बल्कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।नगर आयुक्त का बयान:
“नगर निगम की छवि को धूमिल करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा — फिर चाहे वह ठेकेदार हो, कर्मचारी या अधिकारी। फर्म को नोटिस भेजा गया है और नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।”— संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त, बरेली