अगले हफ्ते में 13 अप्रैल को शुक्र मीन राशि में मार्गी यानी सीधी चाल चलने लगेंगे तो अगले दिन 14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर लेंगे। अब आइये जानते हैं अप्रैल ग्रह गोचर का मनुष्यों की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा और किन राशियों को बड़ा फायदा होगा।
कर्क राशि में मंगल करेंगे प्रवेश (Mangal Gochar)
शौर्य, साहस और पराक्रम के कारक मंगल ग्रह 3 अप्रैल 2025 की देर रात 01.32 बजे कर्क राशि में प्रवेश करेंगे और इस राशि में 7 जून 2025 तक रहेंगे। कर्क राशि में मंगल का गोचर नकारात्मक परिणाम दे सकता है।इस समय के भारत पर प्रभाव के बारे में बात करें तो मंगल के कर्क राशि में होने से कुछ पड़ोसी राष्ट्र समस्या पैदा कर सकते हैं। हालांकि भारत उपद्रव को शांत करने में कामयाब होगा और इस अवधि में शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देने में सफल रहेगा। इस समय यातायात दुर्घटनाओं को लेकर भी निराशाजनक समाचार मिल सकते हैं। वहीं मंगल गोचर कई राशियों के लिए भी बेहद शुभ फल देने वाला होगा।
मीन राशि में मार्गी होंगे बुध (Budh Margi)
7 अप्रैल को बुद्धि, वाणी, विद्या, तर्क-वितर्क के कारक ग्रह बुध शाम 04.04 बजे मीन राशि में मार्गी होंगे। बुध 7 मई 2025 तक मीन राशि में ही रहेंगे। लेकिन समय-समय पर अपनी स्थितियों में परिवर्तन करेंगे।शुक्र भी मीन राशि में होंगे मार्गी (Shukra Margi)
सुख समृद्धि प्रदाता शुक्र 13 अप्रैल को अपनी उच्च राशि यानी मीन राशि में मार्गी हो जाएंगे। शुक्र यहां पर 31 मई 2025 तक रहेंगे। लेकिन इस दौरान शुक्र स्थिति में बदलाव भी करते रहेंगे।43 दिन तक वक्री रहने के बाद जब शुक्र 13 अप्रैल सुबह 05.45 बजे मीन राशि में मार्गी हो जाएंगे। इसका सबी राशियों पर असर पड़ेगा। शुक्र का उच्च राशि में मार्गी होना तमाम क्षेत्रों में ज्यादातर लोगों को अनुकूल परिणाम दे सकता है। लेकिन जिनकी कुंडली में शुक्र शुभ भावों का स्वामी नहीं है या फिर अशुभ भाव में बैठे हैं, उनको कुछ कमजोर परिणाम भी दे सकते हैं।
मेष राशि में सूर्य गोचर (Sun In Aries)
शुक्र के मार्गी होने के अगले दिन 14 अप्रैल को ग्रहों के राजा सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश कर जाएंगे, इसी के साथ खरमास खत्म हो जाएगा। सूर्य मेष राशि में 15 मई तक यहीं रहेंगे। सूर्य का मेष राशि यानी मित्र ग्रह की राशि में जाना सूर्य को और मजबूती देता है।यदि भारत की बात करें तो मेष राशि में सूर्य गोचर आंतरिक कलह उत्पन्न करा सकता है। हालांकि आंतरिक डेवलपमेंट को सपोर्ट भी दे सकता है। विदेश के साथ भारत के संबंध भी बेहतर हो सकते हैं। लेकिन किसी न किसी तरह से सत्तारूढ़ दल अपना हित साध लेंगे।