महेंद्र सागर तालाब से पूरे शहर का भूमिगत जलस्तर बना हुआ है तो इस तालाब से जुड़े आधा दर्जन तालाब लगभग 100 हेक्टेयर में ङ्क्षसचाई के लिए पानी उपलब्ध कराते हैं। बारिश के पानी को संरक्षित करने की इन तालाबों में अद्भुत क्षमता है और इनकी बनावट भी बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए खास है। महेंद्र सागर तालाब में पानी रहने से पूरे पुराने शहर का जलस्तर बना रहता है। कई बार सूखा की स्थिति निर्मित होते ही जैसे ही महेंद्र सागर तालाब खाली होता है तो पूरे शहर में जल संकट खड़ा हो जाता है। यही वजह है कि जिले के जागरूक लोग इस तालाब को संरक्षित करने कई बार खुद ही जहां श्रमदान करते हैं तो प्रशासन से भी इसके संरक्षण के लिए मांग करते रहते हैं। अब इस तालाब को केंद्र सरकार के स्वच्छ जल स्वच्छ मन मिशन में शामिल किया गया है। उनका कहना था कि इस तालाब को पूरी तरह से संरक्षित किया जाएगा।
प्रतापेश्वर मंदिर और ताल कोठी है पहचान विदित हो कि इसी तालाब पर ऐतिहासिक प्रतापेश्वर शिव मंदिर है तो ताल कोठी यहां की पहचान है। इस तालाब को योजना में प्रतापेश्वर मंदिर के नाम से ही शामिल किया गया है। विदित हो कि तालाब के बीच में बनी लंका आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यह ऐतिहासिक तालाब जल संग्रहण के साथ ही पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकता है।
इसके लिए प्रशासन ने भी अपनी ओर से योजना तैयार की है। वहीं केंद्र सरकार से इसके लिए अब 3 करोड़ का बजट दिया जाएगा। किया जाएगा संरक्षित सीएमओ ओमपाल ङ्क्षसह ने बताया कि केंद्र सरकार की स्वच्छ जल स्वच्छ मन मिशन में तालाब को शामिल किया गया है। योजना में देश के 1500 तालाब शामिल किए गए हैं। इसे शामिल किए जाने के संबंध में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख अभियंता ने पत्र जारी कर जानकारी दी है। केंद्र सरकार की अमृत परियोजना के तहत संत निरंकारी मिशन के सहयोग से इस पूरे तालाब का संरक्षण कर इसे सुंदर बनाने का काम किया जाएगा।