Kathavachak Death: जिंदगी का कोई भरोसा नहीं कब किसका साथ छोड़ दे..ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले से सामने आया है जहां दिन में कथा के दौरान भक्तों से कथावाचक ने कहा कि एक दिन सभी को जाना है और उसी रात जब कथावाचक पंडित जी रात में सुबह सोए तो सुबह जागे ही नहीं। कथावाचक की सोते वक्त ही साइलेंट अटैक आने से मौत हो गई। कथावाचक की मौत के बाद उनके शव को उनक गृहग्राम ले जाया गया जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।
राजगढ़ जिले के ब्यावरा में राधा-कृष्ण मंदिर में शिव पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा था। 31 मार्च से शुरू हुई कथा 6 अप्रैल तक होने वाली थी। दो दिन से इंदौर वाले पंडित राकेश व्यास भक्तों को भक्तों को शिव महिमा सुना रहे थे। आयोजक समिति के कालूराम गुर्जर ने बताया कि मंगलवार को शिव महापुराण कथा के दौरान कथावाचक ने विभिन्न प्रसंग पर कथा सुनाई थी। उन्होंने कहा था कि जिंदगी रंज-ओ-गम का मेला है। कल मैं रहूं या ना रहूं, तुम रहो या ना रहो, कथा का श्रवण कर लीजिए, एक दिन राजा हो या रंक या फकीर सबको जाना ही है। कथावाचक की अचानक मौत से कथा स्थल पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि मंगलवार को कथा खत्म होने के बाद पंडित राकेश व्यास रात करीब दो बजे तक बातचीत करते रहे। इसके बाद सोए तो फिर सुबह नहीं उठे। सुबह जब आयोजनकर्ता चाय लेकर उन्हें उठाने पहुंचा तो वो नहीं जागे उनका शरीर ठंडा पड़ा हुआ था। जिसके बाद तुरंत उन्हें ब्यावरा के निजी नर्सिंग होम ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि नींद में ही उन्हें अटैक आ गया था। कथा वाचक पंडित राकेश व्यास का अंतिम संस्कार इंदौर के पास उनके गृह गांव बावल्या खुर्द में हुआ।