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Raipur News: एम्स में अनूपपुर की 22 वर्षीय छात्रा को मिला नया जीवन, सफल रहा किडनी ट्रांसप्लांट

Raipur News: किडनी ट्रांसप्लांट वार्ड विकसित किया जा रहा है और हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए मेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 18 मार्च को अनूपपुर की 22 वर्षीय छात्रा को उनकी माता ने किडनी डोनेट किया।

रायपुरMar 26, 2025 / 12:13 pm

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Raipur News: एम्स में 22 वर्षीय छात्रा को मिला नया जीवन, सफल रहा किडनी ट्रांसप्लांट
Raipur News: एम्स में 50वां सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। प्रदेश का यह पहला सरकारी सेंटर है, जहां किडनी ट्रांसप्लांट हो रहा है। दूसरी ओर, राज्य सरकार डीकेएस सुपर स्पेशलिटी की स्थापना के 6 साल बाद भी किडनी ट्रांसप्लांट शुरू नहीं कर सका है। वहां टीम तो है, लेकिन जरूरी उपकरण की कमी है। उपकरण के लिए फंड स्वीकृत हो गया है।
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एस में 20 बेड का किडनी ट्रांसप्लांट वार्ड विकसित किया जा रहा है और हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए मेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 18 मार्च को अनूपपुर की 22 वर्षीय छात्रा को उनकी माता ने किडनी डोनेट किया। छात्रा पिछले साल जनवरी से किडनी रोग से पीड़ित थी और मार्च 2024 से डायलिसिस पर थी। एस में पहला ट्रांसप्लांट 2022 में शुरू हुआ था। यहां मृतक अंगदान एवं ट्रांसप्लांट यानी केडेवर ट्रांसप्लांट भी किया जा रहा है।
अब तक 50 किडनी ट्रांसप्लांट में से 40 जीवित और 10 मृतक शामिल है। डॉ. राठौर ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए रोगी और प्रत्यारोपित अंग की सफलता दर 96% है। इनमें से 46 मरीजों का ट्रांसप्लांट आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क किया गया। अब तक मध्य प्रदेश के 4 और उत्तर प्रदेश के 2 मरीजों का ट्रांसप्लांट किया गया है। विशेष किडनी ट्रांसप्लांट क्लीनिक में 90 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ता और उनके डोनर का नियमित फॉलोअप किया जा रहा है।
75 कार्निया व एक स्किन ट्रांसप्लांट भी

एस में 75 कॉर्नियल ट्रांसप्लांट और 1 त्वचा प्रत्यारोपण भी किया जा चुका है। हृदय प्रत्यारोपण की अनुमति मिल चुकी है। इस कार्यक्रम के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को चेन्नई के एमजीएम अस्पताल में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।यह ट्रांसप्लांट शुरू होने से मरीजों को जीवनदान मिलेगा।
हार्ट ट्रांसप्लांट काफी क्रिटिकल होता है और एस यह शुरू कर इतिहास रच सकता है। हालांकि एसीआई में दो कार्डियक सर्जन है, लेकिन एनेस्थेटिस्ट व जरूरी स्टाफ नहीं होने से कोरोनरी बायपास सर्जरी भी एक ही हुई है। हार्ट ट्रांसप्लांट तो अभी दूर की कौड़ी है। हालांकि कार्डियक सर्जन का कहना है कि जरूरी उपकरण व स्टाफ हो तो हार्ट ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू की जा सकती है।

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