कई वरिष्ठ नागरिक ब्याज आय पर निर्भर रहते हैं। कुछ लोगों को पेंशन भी मिलती है। लेकिन दोनों ही प्रकार की आय समय के साथ बढ़ते मूल्यस्तर के मुकाबले क्षीण होती जाती हैं। दूसरी ओर स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम लगातार बढ़ रहा है। भारतीय बीमा विनियामक तथा विकास प्राधिकरण (इरडा) के इसी वर्ष तीस जनवरी को जारी निर्देशों के अनुसार बीमा कंपनियां वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में दस प्रतिशत प्रतिवर्ष तक की बढ़ोतरी ही कर सकती हैं। इससे अधिक बढ़ोतरी के लिए इरडा से विचार-विमर्श जरूरी होगा। इसे बुजुर्गों को राहत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रीमियम की वर्तमान उच्च दरों पर बढ़ोतरी की कोई गुंजाइश है? अधिक प्रीमियम के कारण बहुत बड़ी संख्या में बुजुर्ग या तो स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने में असमर्थ हैं या पर्याप्त राशि का कवर नहीं ले पाते हैं।
एक सरकारी बीमा कंपनी के जरिए विशेष तौर पर वरिष्ठ नागरिकों की मेडिक्लेम पॉलिसी में 61-65 वर्ष आयु वर्ग के दंपती को देश के किसी भी शहर में इलाज के लिए 10 लाख रुपए के कवर के लिए जीएसटी सहित वार्षिक प्रीमियम लगभग 79 हजार 300 रुपए चुकाना पड़ता है। 66-70, 71-75 तथा 76-80 आयु वर्ग के लिए यह क्रमश: लगभग एक लाख २० हजार 500 रुपए, एक लाख 40 हजार 700 रुपए, एक लाख 63 हजार 200 रुपए तक है।
बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य बीमा पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी भी बहुत भारी बोझ है। स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी खत्म करने की मांग कई बार उठ चुकी है, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया गया है। संसद के वर्तमान सत्र में पेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की एक रिपोर्ट में 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को, चाहे उनकी आय कितनी भी हो, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निशुल्क शामिल करने की सिफारिश की है। फिलहाल यह आयु सीमा 70 वर्ष है। समिति ने योजना के सभी लाभार्थियों के लिए बीमा राशि 5 से बढ़ाकर 10 लाख रुपए प्रति परिवार करने की सिफारिश भी की है। यदि सरकार इन सिफारिशों को मान लेती है तो निश्चित ही बुजुर्गों को महंगे व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा के विकल्प के रूप में इस योजना से कुछ राहत अवश्य मिलेगी।