Nagaur patrika…प्रदेश के जिला स्तरीय पंचकर्म केन्द्रों के संचालन में राज्य सरकार की कंजूसी बनी बाधक
–राजस्थान के जिलों में पंचकर्म केन्द्रों पर पंचकर्म विशेषज्ञों की जगह लगे सामान्य चिकित्सक, विशेष तौर पर पंचकर्म केन्द्र के लिए अलग से न तो नर्सिंग स्टॉफ लगाया, और न ही मसाजर की नियुक्तियां की, प्लेसमेंट एजेंसी करती है मसाजर की आपूर्ति-पंचकर्म के लिए अलग से पंचकर्म विशेषज्ञ लगें, और नर्सिंग स्टॉफ के साथ मसाजर, […]


–राजस्थान के जिलों में पंचकर्म केन्द्रों पर पंचकर्म विशेषज्ञों की जगह लगे सामान्य चिकित्सक, विशेष तौर पर पंचकर्म केन्द्र के लिए अलग से न तो नर्सिंग स्टॉफ लगाया, और न ही मसाजर की नियुक्तियां की, प्लेसमेंट एजेंसी करती है मसाजर की आपूर्ति
-पंचकर्म के लिए अलग से पंचकर्म विशेषज्ञ लगें, और नर्सिंग स्टॉफ के साथ मसाजर, फिर हो इसका बेहतर संचालन
नागौर. राज्य सरकार की ओर से पंचकर्म केन्द्रों को सुविधाएं देने में कंजूसी बरती जा रही है। मापदण्ड के अनुरूप न तो सुविधाएं हैं, और न ही संसाधन। अब ऐसे में कई जिलों में तो चिकित्सक खुद के स्तर पर संसाधनों का जुगाड़ कर बमुश्किल इसे चला रहे हैं। स्थिति यह है कि पंचकर्म चिकित्सा के लिए भी पंचकर्म विशेषज्ञों की जगह सामान्य चिकित्सक को लगाए जाने के साथ मसाजर की पूर्ति प्लेसमेंट एजेंसी के जरिये की जा रही है। दवाएं भी कई बार समय पर नहीं मिल पाती है। अब ऐसे में यह केन्द्र संचालित तो हो रहे हैं, लेकिन सुविधा एवं संसाधनों के अभाव में योजनागत उद्देशों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
प्रदेश के जिलों में स्थापित पंचकर्म केन्द्रों में ज्यादातर के लिए न तो अलग से भवन बना है, और न ही पंचकर्म विशेषज्ञों को लगाया गया है। हालांकि संचालित केन्द्रों की सेवाएं विभाग की ओर से नियुक्ति किए गए चिकित्सकों के मार्फत जैसे-तैसे चल रही है, लेकिन इसके लिए विशेषज्ञों की नियुक्तियां नहीं होने के चलते पर्याप्त सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पा रही है। विभागीय जानकारों के अनुसार पंचकर्म केन्द्रों में चार से पांच चिकित्सक एवं इतनी संख्या में कंपाउण्डर्स का पद होता है। जिला छोटा है तो यह संख्या चार की होती है, नहीं तो बड़ा है तो फिर पांच चिकित्सकों की नियुक्तियों का प्रावधान है।
प्रदेश में कहीं भी स्थिति संतोषजनक नहीं
प्रदेश के धौलपुर, चूरू, हनुमानगढ़, करौली, सवाई माधोपुर, जैसलमेर, पाली, दौसा, सिरोही, झुंझुनू, सीकर, बूंदी, बारां, झालावाड़, कोटा, बांसवाड़ा, चित्तौडगढ़़, डूंगरपुर, राजसमंद,जालौर, भरतपुर, जोधपुर , अलवर, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, टोंक और उदयपुर आदि में एक भी जगह स्थिति पूरी तरह से संतोषजनक नहीं है। हालांकि कुछ जगहों पर संसाधन तो पूरे उपलब्ध हैं, लेकिन स्टॉफ का अभाव है। जिन जगहों पर संसाधन पूरे हैं, वहां पर भी चिकित्सकों के स्तर पर कुछ संसाधन जुटाए गए हैं। तब जाकर संसाधन तो पूरे हो गए, लेकिन स्टॉफ के अभाव में सुचारु रूप से संचालन में ज्यादातर जगहों पर मुश्किल आ रही है।
क्या होता है पंचकर्म
यह पंचकर्म उपचार मुख्य रूप से त्रिदोष (तीन दोष अर्थात वात, पित्त, कफ) पर लक्षित है। ये तीन दोष संतुलन में होने पर अच्छे स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार होते हैं और जब यह संतुलन बिगड़ जाता है तो बीमारी पैदा करते हैं। इसमें अभ्यंग (पारंपरिक मालिश) और स्वेद (किज़ी या औषधीय बोलस, भाप स्नान आदि जैसे कई तरीकों के माध्यम से थर्मल थेरेपी) जैसी प्रारंभिक प्रक्रियाएं भी शामिल हैं। पंचकर्म को शरीर में जमा हुए चयापचय अपशिष्टों को खत्म करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इस तरह धातुओं (सात प्रकार के ऊतकों) के पोषण मार्ग को साफ करता है।
पंचकर्म केन्द्रों में यह होते हैं संसाधन
अभयंग (मालिश) टेबल, बिस्तर, मापने वाले चश्मे- अलग-अलग आकार के, स्टील ग्लास, फिटिंग के साथ गैस, तौलिए, प्लास्टिक एप्रन, शिरोधारायंत्र, , धरापात्रा, शिरोबस्तियंत्र प्लास्टिक कैप्स, धारकों, बड़े चम्मच, स्टील के बर्तन, प्रेशर कुकर, घूमने वाले स्टूल, कम्बल, सर्वांग स्वेदानप्टिका, फ्राइंग पैन के साथ फ्राइंग चम्मच, इन्फ्रारेड लैंप, पोटाली, ब्लूका, गरम पानी का झरना, टब स्नान, नैपकिन, वामन के लिए बेसिन, बाल्टी, खलवा यंत्र सहित कुल 77 प्रकार के अलग-अलग सामान होते हैं।
इनका कहना है…
पंचकर्म केन्द्रों के लिए न तो स्टॉफ का अभाव रहेगा, और न ही दवाओं की कमी होने दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। जल्द ही पंचकर्म केन्द्रों की पहले से और भी बेहतर हो जाएगी।
डॉ. आनन्द शर्मा, निदेशक, आयुर्वेद विभाग
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