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मोरेना

सुरक्षा के मानकों की अनदेखी के बीच हाइवे किनारे संचालित है दो दर्जन बायोफ्यूल प्लांट

जड़ेरुआ, नूराबाद और बानमौर में टायर जलाकर तेल निकालने काम होता है फैक्ट्रियों में, न पॉल्यूशन बोर्ड की एनओसी न फायर सेफ्टी, फिर भी चल रहे प्लांट

मोरेनाApr 02, 2025 / 03:10 pm

Ashok Sharma

मुरैना. जिले के जड़ेरुआ, नूराबाद व बानमोर में टायर से तेल निकालने की दो दर्जन बायोफ्यूल प्लांट संचालित हैं। इन फैक्ट्रियों में न तो पॉल्यूशन बोर्ड की एनओसी और न फायर सेफ्टी सिस्टम मजबूत है। जब भी आग लगती है तो मुरैना, मालनपुर भिंड और ग्वालियर की फायरबिग्रेड आग बुझाने आती हैं, तब बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाया जाता है। विडंवना इस बात की है कि जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इन फैक्ट्रियों का कभी निरीक्षण नहीं किया। अगर समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
नेशनल हाइवे क्रमांक 44 के किनारे संचालित फैक्ट्रियों में पुराने टायर जलाकर तेल निकाला जाता है। इसके लिए फैक्ट्रियों में बड़े- बड़े बायलर लगाए गए हैं। इन बायलरों में पूर्व में कई बार विस्फोट होकर आग लग चुकी है। जिससे जनहानि और बड़े स्तर पर धनहानि हो चुकी है। इन प्लांटों को शहर के कुछ व्यवसायियों ने जड़ेरुआ, नूराबाद और बानमोर में लगाया है। इन फैक्ट्रियों में स्थानीय कम बाहरी प्रदेशों की लेवर बड़ी संख्या में काम कर रही है। विशेष तो यह है कि स्थानीय प्रशासन के साथ- साथ अन्य विभागों के जिम्मेदार भी इन फैक्ट्रियों में चेकिंग करने नहीं पहुंचते इसलिए फैक्ट्री संचालक मनमानीपूर्वक इनका संचालन कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन फैक्ट्रियों में हर समय जोखिम रहता है इसलिए अक्सर संचालक नहीं बैठते, उन्होंने अन्य लोगों को व्यवस्थापक बनाकर बैठा दिया है। जिससे जब भी हादसा होता है, मालिक लोग सेफ बच जाते हैं और मजदूर चपेट में आ जाते हैं।

छह साल पूर्व हो चुकी है तीन मजदूरों की मौत

बानमोर की एक बायोफ्यूल फैक्ट्री में छह साल पूर्व आग लग गई थी। बॉयलर में प्लास्ट होने पर पांच मजदूर चपेट में आए थे। जिनमें से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी और दो घायल हुए थे। चूंकि मजदूर उप्र के रहने वाले थे, इसलिए मालिक ने पैसे देकर मामला रफा-दफा कर दिया था। इसलिए फैक्ट्री मालिक ज्यादातर बाहर के मजदूरों को ही काम पर रखते हैं।

हॉटमिक्स प्लांट में काम आता है बायोफ्यूल

फैक्ट्रियों में पुराने टायर जलाकर उनसे निकलने वाला बॉयोफ्यूल (तेल) हॉटमिक्स प्लांट (डामर गिट्टी मिलाने वाली मशीन) एवं ब्रेड पकाने वाली भट्टियों में जलाने के काम आता है। 100 किलो वजन के टायर में 40 किलो तेल निकलता है। जो बाजार में करीब 40 से 43 रुपए किलो के हिसाब से बिकता है। इससे निकलने वाला काबर्न यूपी में भट्टों पर ईंट पकाने लकड़ी की जगह जलाने के काम आता है।

ये है किसानों की पीड़ा

टायर जलाकर तेल निकालने वाली फैक्ट्रियों से निकलने वाले धूएं व गंदगी से आसपास की खेती किसानी प्रभावित हो रही है। धूएं से फैल रहे प्रदूषण से लोग बीमार हो रहे हैं।

संजय गुर्जर, किसान

अधिकारियों की सांठगांठ के चलते टायर जलाकर तेल निकालने वाली फैक्ट्री संचालित हैं, इनमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, कई बार हादसा हो चुका है।

पप्पू गुर्जर, उप सरपंच, दोहरावली

ये हो चुके हैं हादसे

19 सितंबर 2018 को नूराबाद थाना क्षेत्र के जड़ेरुआ में एक बायो फ्यूल फैक्ट्री में आग लगने से लाखों की क्षति हुई थी।
21 सितंबर 2020 को बानमोर क्षेत्र के औद्योगिक एरिया में स्थित ग्लोबल बायो फ्यूल फैक्ट्री में लगी आग को बुझाने आई थीं मुरैना, ग्वालियर व भिंड की दमकल गाडिय़ां।
11 जून 2021 को नूराबाद थाना क्षेत्र के जड़ेरुआ में स्थित आर बी ग्रीनटेक बायो फ्यूल फैक्ट्री में आग लगी थी।
01 अक्टूबर 2023 को नूराबाद थाना क्षेत्र के जड़ेरुआ में स्थित बिनायक बायो फ्यूल फैक्ट्री में लगी थी आग।
13 जनवरी 2024 को नूराबाद थाना क्षेत्र के जड़ेरुआ में अंजली बायो फ्यूल फैक्ट्री में लगी थी आग।
बानमोर, नूराबाद क्षेत्र में संचालित बॉयोफ्यूल फैक्ट्रियों में किसानों की शिकायत पर टीम बनाकर जांच करवाई जाएगी, अगर वहां अनियमितताएं पाई गई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

सी बी प्रसाद, अपर कलेक्टर, मुरैना

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