UP Primary Schools: यूपी सरकार का बड़ा फैसला: अब 6 साल की उम्र पूरी करने की नई डेडलाइन तय,जानें पूरी डिटेल
Primary School Rules: उत्तर प्रदेश सरकार ने कक्षा 1 में प्रवेश की आयु सीमा में बदलाव किया है। अब 31 जुलाई तक 6 साल पूरे करने वाले बच्चे ही नामांकन के पात्र होंगे। यह बदलाव शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के तहत किया गया है और आगामी सत्र 2025-26 से प्रभावी होगा।
Up Admission Rules: उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 1 में प्रवेश नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले केवल वे ही बच्चे पहली कक्षा में नामांकित हो सकते थे, जो 1 अप्रैल तक छह वर्ष की आयु पूरी कर लेते थे, लेकिन अब यह सीमा 31 जुलाई तक बढ़ा दी गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने इस बदलाव को शैक्षणिक सत्र 2025-26 से स्थायी रूप से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। इस फैसले से न केवल बच्चों और अभिभावकों को राहत मिलेगी, बल्कि नामांकन प्रक्रिया भी अधिक सुव्यवस्थित होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत प्रारंभिक शिक्षा में सुधार लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। पहले 1 अप्रैल तक 6 वर्ष पूरे करने वाले बच्चों को ही पहली कक्षा में प्रवेश की अनुमति थी। इस कारण कई बच्चे नामांकन से वंचित रह जाते थे। शिक्षकों और अभिभावकों की मांग को देखते हुए जून 2024 में सरकार ने यह नियम बदला और अब 31 जुलाई तक 6 साल पूरे करने वाले बच्चे भी पहली कक्षा में दाखिला ले सकेंगे। इस निर्णय से नामांकन दर में वृद्धि होने की संभावना है।
नई आयु सीमा का प्रभाव
इस बदलाव से कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे:
अधिक बच्चों को प्रवेश का अवसर – अब बड़ी संख्या में बच्चे पहली कक्षा में प्रवेश के पात्र होंगे।
अभिभावकों को अधिक स्पष्टता – माता-पिता को अब अपने बच्चों की स्कूली शिक्षा को लेकर अधिक स्पष्टता मिलेगी।
शिक्षकों की सुविधा – शिक्षकों को नामांकन प्रक्रिया के दौरान कम जटिलता का सामना करना पड़ेगा।
संगठित शिक्षा व्यवस्था – यह नियम सभी स्कूलों के लिए एक समान होगा जिससे शिक्षा व्यवस्था अधिक स्थिर होगी।
बेसिक शिक्षा निदेशक ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देश जारी किए हैं कि 2025-26 सत्र से यह नियम स्थायी रूप से लागू रहेगा। यह नियम सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में समान रूप से लागू होगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करेगा और बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास को भी ध्यान में रखेगा।
अभिभावकों की प्रतिक्रिया
अभिभावकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। कई माता-पिता इस बात से संतुष्ट हैं कि अब उनके बच्चों को स्कूल में प्रवेश के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा और वे बेहतर तरीके से शिक्षा के लिए तैयार होंगे।
लखनऊ के एक अभिभावक, रवि श्रीवास्तव, ने कहा”पहले 1 अप्रैल की समय सीमा के कारण कई बच्चों को अगले साल तक इंतजार करना पड़ता था। अब इस बदलाव से बच्चों का शैक्षिक भविष्य और अधिक सुरक्षित होगा।”
शिक्षक संगठनों की राय
शिक्षक संघों ने इस बदलाव को सकारात्मक कदम बताया है। लखनऊ के एक वरिष्ठ शिक्षक, सुनील तिवारी, ने कहा: “यह फैसला न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों के लिए भी फायदेमंद है। इससे स्कूलों में नामांकन दर में वृद्धि होगी और शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा।”
नए नियमों से प्रभावित स्कूल
यह नियम उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू होगा। सभी स्कूलों को अपने प्रवेश प्रक्रिया को 31 जुलाई की समय सीमा के अनुसार अपडेट करना होगा।
प्रवेश प्रक्रिया को नए नियमों के अनुसार संशोधित करना होगा।
स्कूलों को जागरूकता अभियान चलाना होगा ताकि अभिभावकों को नई आयु सीमा के बारे में जानकारी दी जा सके।
स्कूलों को नामांकन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना होगा।
अन्य राज्यों की नीति से तुलना
उत्तर प्रदेश ने यह नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू किया है। अन्य राज्यों में भी इस प्रकार के बदलाव देखे गए हैं:
महाराष्ट्र – 30 जून तक 6 साल की आयु पूरी करने वाले बच्चों को प्रवेश दिया जाता है।
दिल्ली – 31 मार्च तक 6 साल पूरे करने वाले बच्चों को पहली कक्षा में प्रवेश मिलता है।
कर्नाटक – वहां भी 31 जुलाई तक 6 वर्ष पूरे करने वाले बच्चों को प्रवेश देने की व्यवस्था की गई है।
उत्तर प्रदेश में यह बदलाव अन्य राज्यों की नीतियों के अनुरूप है और इससे राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता बनी रहेगी।
भविष्य में संभावित बदलाव
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में आयु सीमा को 31 अगस्त या 30 सितंबर तक बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है, ताकि अधिक बच्चों को लाभ मिल सके। इसके अलावा, डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लासेस को भी बढ़ावा देने की योजना पर काम किया जा रहा है ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और सुव्यवस्थित बनाएगा। अब 31 जुलाई तक 6 साल पूरे करने वाले सभी बच्चों को पहली कक्षा में प्रवेश मिलेगा। इस कदम से नामांकन दर में वृद्धि होगी, अभिभावकों की परेशानियां कम होंगी और शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता आएगी।
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