इधर, स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों को जो दवा दी जा रही है, वह ज्यादा कारगर साबित नहीं हो रही है। उनकी मांग है कि जिला प्रशासन एक टीम का गठन करे, जो गांव पहुंचकर उनकी समस्याओं को जाने फिर काम शुरू करे।
CG News: गांव में नहीं हुआ काम, समस्या गंभीर
ग्रामीणों ने बताया कि
स्वास्थ्य विभाग की ओर अभी तक गांव में किसी चर्मरोग विशेषज्ञ डॉक्टर को नहीं भेेजा गया है। बल्कि एमबीबीएस डॉक्टर और स्टॉफ नर्स से गांव में शिविर लगाकर इलाज कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जो दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही है, उसका अभी असर दिखाई नहीं दे रहा है।
गांव में रहने वाले बाबूलाल पंडो ने बताया कि कोयला खदान ने उनका सबकुछ छीन लिया है। खेतों में गंदा पानी जमा हो गया है। जो खेत सूखे हैं वहां
कोयले की कालिख की परत इतनी मोटी है कि उसकी जोताई नहीं हो पाती। पीने के लिए भी प्रबंधन साफ पानी उपलब्ध नहीं कराता है। बीमारी के इलाज के लिए बाबूलाल ने स्वास्थ्य विभाग से विशेषज्ञ डॉक्टर भेजने की मांग की है।
सीएमएचओ बोले सफाई जरुरी, रोज स्नान करने की दी सलाह
इधर, जिले के मुख्य चिकित्सा एवं
स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केसरी ने बताया कि केंदई में ग्रामीणों के स्केबिज होने की जानकारी मिली है। स्केबिज को आमतौर पर खुजली के नाम से जाना जाता है, यह एक त्वचा संबंधी रोग है जो सरकोप्टस स्कैबीई नामक छोटे कीड़ों (माइट्स) की वजह से होता है।
उन्होंने कहा कि इस रोग गंदे पानी से हो रही बीमारी से बचने के लिए स्वच्छता जरुरी है। ग्रामीणों को रोजाना साफ पानी से स्नान करना चाहिए। कपड़े धोकर और आयरन करके पहनने की जरुरत है ताकि इस रोग के कीड़ों को मारा जा सके।
गंदे पानी से हो रही बीमारी
ग्राम पंचायत अड़सरा के आश्रित गांव केंदई में यह बीमारी गंदे पानी के उपयोग से हो रही है। गांव में भू- जल स्तर पताल लोक में पहुंच गया है। इसका बड़ा कारण
एसईसीएल की विजय वेस्ट कोयला खदान है। विजय वेस्ट खदान से निकलने वाला गंदा पानी ग्राम केंदई में ग्रामीणों के घर के पास से होकर गुजरता है।
इस पानी में कोयला और खतरनाक रसायन है। इससे पानी का रंग काला दिखाई देता है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में साफ पानी की समस्या गंभीर है। उन्हें पीने के लिए कई बार साफ पानी नहीं मिलता है। मजबूरी में खदान का काला पानी भी छानकर पीना पड़ता है।
गांव में नहीं पहुंचा नल से जल, डीएमएफ की राशि भी यहां नहीं हुई खर्च
ग्राम पंचायत अड़सरा के आश्रित गांव केंदई में
आदिवासी जनजाति पंडो के 38 परिवार निवासरत हैं। पूरा केंदई कोयला खदान से प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित है, लेकिन इस गांव में अभी तक नल से जल नहीं पहुंचा है। एक हैंडपंप को भी हाथी ने तोड़ दिया था। पंडोपारा के लोग लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर से ढोढ़ी से जल लेकर अपनी जरूरतों की पूर्ति करते हैं।
पंडोपारा में ग्रामीणों के लिए एक बोर भी लगाया गया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की लचर आपूर्ति के कारण बोर से कई-कई दिन पानी भी नहीं आता। डीएमएफ की राशि भी यहां खर्च नहीं हुई है।