एक दर्जन बड़ी लाइटें लगाई
घटना स्थल पर रात को ऊजाले के लिए एक दर्जन बड़ी हेलोजन लाइटें लगाई गई। इस दौरान पूरा प्रशासन मौजूद रहा।
परिजन बेहाल .
हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता कालूलाल ने रोते हुए बताया कि हादसे के समय वे पास में ही गेहूं की कटाई कर रहे थे। वह बोरवेल के मुंह पर लगे पत्थर पर बैठकर रोटी खा रहा था। अचानक वह पत्थर समेत बोरवेल के अंदर चला गया। हम पास में ही थे, इसलिए हादसे का पता चल गया। पजिन और ग्रामीण भगवान से बच्चे की सलामती की प्रार्थना कर रहे है।
जिले का पहला मामला-
झालावाड़ जिले में बोरवेल में बच्चे के गिरने का यह पहला मामला बताया जा रहा है। प्रदेश में बच्चों के बोरवेल में गिरने के कई हादसे हो चुके है। गत 23 दिसम्बर को कोटपूतली के किरतपुरा की ढाणी बडियावाली में साढ़े तीन वर्षीय बालिका चेतना गिर गई थी। उसे दस दिन बाद मृत अवस्था में निकाला जा सका था। प्रदेश में बार.बार हो रहे हादसे के लिए प्रशासन के साथ खुद स्थानीय लोग भी जिम्मेदार हैं। ग्रामीण क्षेत्र में जगह.जगह सूखे कुएं व बोरवेल खुले पड़े हैए जो हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं। बोरवेल खुदाई को लेकर राज्यों में संबंधित विभाग के साथ उच्च न्यायालयों के भी निर्देश हैं। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नियमों को पालन कराने की जिम्मेदारी कलक्टर की होगी। वे सुनिश्चित करेंगे कि केंद्रीय या राज्य की एजेंसी के साथ.साथ सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी गाइड लाइन का सही तरीके से पालन हो।
रोटी खा रहा था
पुलिस के अनुसार पालड़ा निवासी कालूलाल बागरी रविवार दोपहर अपने खेत पर परिजनों के साथ गेहूं काट रहा था। इसी दौरान खेत की मेड़ के पास खुदे बोरवेल के पास उसका पांच साल का बेटा प्रहलाद खाना लेकर पहुंच गया। वह खाना बोरवेल के मुंह पर रखे पत्थर पर बैठ गया। बैठते ही पत्थर समेत वह अंदर गड्ढे में जा गिरा। यह देखकर उसके पिता ने शोर मचाया। शोर सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण मौके पर पहुंचे। उन्होंने रस्सी डालकर प्रह्लाद को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।ग्रामीणों ने पानी पिलाया
हादसे के बाद काफी देर तक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। ग्रामीणों ने उसके पास रस्सी के जरिए पानी भी पहुंचाया गया, जिसे उसने पी लिया। वह रस्सी के सहारे करीब चार फीट तक ऊपर भी आया, लेकिन फिर रस्सी से हाथ छूट जाने से वह नीचे चला गया। गांव के सरपंच की सूचना पर पुलिस, प्रशासन और चिकित्सा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने गैस पाइप के जरिए बालक तक ऑक्सीजन पहुंचाना शुरू किया। बचाव दल के अनुसार वह 30 फ ीट गहराई पर अटका हुआ है।
सात मशीनों से खुदाई
मौके पर पहुंचे जिला परिषद सीईओ शंभुदयाल मीणा ने बताया कि ग्रामीण जुगाड़ से रस्सी डालकर बालक निकालने का प्रयास कर रहे हैं। बोरवेल से 70 फीट की दूरी पर दो एलएनटी व पांच जेसीबी मशीनों से खुदाई शुरू कर दी गई है। कोटा से रात को एनडीआरएफ और झालावाड़ से एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंची। बोरवेल के पास भीड़ न हों, इसके लिए उसके आसपास बैरिकेडिंग की गई है। मौके पर भारी भीड़ जमा है।यह है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन
.बोरवेल की खुदाई से पहले कलक्टर, ग्राम पंचायत को लिखित सूचना देनी होगी।
.खुदाई करने वाली सरकारीए अर्धसरकारी संस्था या ठेकेदार का पंजीयन होना चाहिए।
.बोरवेल की खुदाई वाले स्थान पर साइन बोर्ड हो।
.खुदाई के दौरान आसपास कंटीले तारों की फेंसिंग हो।
. फेसिंग पाइप के चारों तरफ सीमेंटएकंक्रीट का आधा मीटर ऊंचा प्लेटफ ार्म बनाना चाहिए
.बोर के मुहाने को स्टील की प्लेट वेल्ड की जाए या नट.बोल्ट से अच्छी तरह कसना होगा
.पम्प रिपेयर के समय बोरवेल के मुंह को बंद रखा जाएगा
. बोरवेल की खुदाई पूरी होने के बाद खोदे गए गड्ढे और पानी वाले मार्ग को समतल किया जाएगा।
” बच्चे को बचाने के पूरे प्रयास किए जा रहे है। पूरा प्रशासन मौके पर ही मौजूद है। एसडीआरएफ की टीम आ चुकी है। बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचा दी गई है। खुदाई के दौरान कम्पन्न होने से दिक्कत हो रही है। बच्चे के ऊपर पूरी नजर बना रखी है। अनुभवी टीमों से सलाह ले रहे है।