डॉक्टरों की दलाली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
शहर के प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर चल रही धंधेबाजी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।जिसमें गोरखपुर शहर के आठ अस्पतालों में मरीज माफिया का नेटवर्क कितना मजबूत है यह बताने की जरूरत नहीं है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि इन अस्पतालों में मरीज भर्ती कराने पर एंबुलेंस चालक से लेकर एजेंट्स तक को अलग-अलग रेट से रुपये मिलते हैं। वीडियो वायरल होने के बाद जिले में हड़कंप मचा हुआ है। सीएमओ ने इन आठ अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इनमें से चार का लाइसेंस अस्थाई रूप से निलंबित भी किया गया है।यह कोई नया मामला नहीं है। मरीजों की दलाली काफी वर्षों से चल रही है। पिछले वर्ष एक अस्पताल में मृतक का ही इलाज चल रहा था जिससे कि अस्पताल का बिल बढ़ता रहे। कई ऐसे मामले भी पकड़े गए हैं कि मेडिकल कालेज में इलाज कराने आए मरीज को निजी अस्पतालों में दलालों द्वारा भेज दिया गया।
एक वर्ष में 27 अवैध अस्पतालों के विरुद्ध कारवाई
गोरखपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने एक साल में 27 अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई भी की है, लेकिन इस बार जो नाम आए हैं, वे सभी शहर के प्रमुख स्थानों पर चलने वाली और स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत अस्पताल हैं। इनमें से कई अस्पतालों के संचालक शहर के बड़े डॉक्टर हैं।वीडियो में दिख रहा है कि मरीज माफिया एंबुलेंस चालकों, झोलाछाप और दलाल, मरीजों के परिवारीजनों को बहला-फुसलाकर निजी नर्सिंग होम में पहुंचाते हैं, जिसके बदले उन्हें दो हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का कमीशन मिलता है।मामला सामने आने के बाद सीएमओ कार्यालय की ओर से इन अस्पतालों को नोटिस भेजा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई है। बताया जा रहा है कि इनमें से चार निजी अस्पतालों के लाइसेंस को अस्थाई रूप से निलंबित कर नोटिस जारी किया गया है। सभी अस्पताल संचालकों को सात दिन में जवाब देना है।
CMO गोरखपुर
गोरखपुर के सीएमओ आशुतोष दुबे ने बताया कि मरीजों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का जिन अस्पतालों पर आरोप है, उनसे एक सप्ताह में जवाब तलब किया गया है। मरीजों को निजी अस्पतालों में जाने वाले एंबुलेंस संचालकों पर भी कार्रवाई होगी। अस्पतालों की तरफ से जवाब मिलने के बाद अगली कार्रवाई होगी। यह मामला उजागर होने के बाद इस मामले में मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा ने बिहार और यूपी राज्य मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में तीन अलग-अलग याचिका दायर की हैं। इसमें उन्होंने कहा है- ‘यह मानवाधिकार कानून के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला है। मामले में डॉक्टर और पूरे अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।’