अभियान के दौरान युवाओं ने यहां मचकुण्ड परिसर में घाटों के पास चबूतरों पर सफाई की। साथ ही कचरा एकत्र कर उसे एक स्थान पर डाला गया। श्रमदान करीब डेढ़ घंटे तक चला। अभियान में जगदीश कुशवाह, मनोज, समीर, किशोर, नितिन, आदित्य, निखिल, नकुल, पवन गौड, मोहित, अश्वनी, टोनी समेत कई युवा शामिल हुए।
महंत कृष्ण दास ने कहा कि मचकुण्ड उत्तर भारत का प्रमुख तीर्थ स्थल है। इसको तीर्थों का भांजा भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्रिका की पहल सराहनीय है। सभी लोग पुराने जलस्रोतों का ध्यान रखें और उनकी सफाई करें तो आसपास की पेयजल समस्या काफी दूर हो सकती है। उन्होंने कहा कि हाल में ही छितरिया ताल के पानी के उपयोग करने को प्रशासन ने अच्छी योजना बनाई है। जगदीश ने कहा कि हमें अपने प्राचीन जलस्रोतों पर ध्यान देने की जरुरत है। धौलपुर शहर में कई बावडिय़ा हैं जो आज देखरेख के अभाव में अपना अस्तिव खो रही हैं। सरकार और प्रशासन को इन पर ध्यान देना चाहिए। पवन ने कहा कि प्राचीन जल स्त्रोत हमारी धरोहर है और बरसाती पानी के संरक्षण में इनका प्रमुख योगदान रहा है। इनको सुरक्षित व संरक्षित रखा जाना आवश्यक है। उन्होंने सरकारी योजनाओं के माध्यम से क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत व अन्य जरूत का निर्माण करवाने की बात कही।