तलघर निर्माण के खिलाफ प्रशासन की निष्क्रियता
शहर में विभिन्न इलाकों में अवैध तलघर निर्माण की शिकायतों के बाद नगर पालिका ने कुछ दिन पहले संबंधितों को नोटिस भेजा था और चालानी कार्रवाई की थी, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी है। वर्तमान में 8 से 10 फीट गहरे तलघर का निर्माण बिना अनुमति के अवैध रूप से किया जा रहा है। इसके चलते आस-पास के भवनों और सडक़ों को भी नुकसान हो रहा है और शहर में संरचनात्मक खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
यहां बिना अनुमति बने तलघर
शहर के वार्ड 34 में मुख्य सडक़ के किनारे प्रशांत साहू द्वारा बेसमेंट बनाने के बाद इसके ऊपर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। यहां के आसपास पहले से मकान स्थित हैं, और बेसमेंट की गहराई 8 से 10 फीट होने से इन मकानों को ढहने का खतरा बना हुआ है। इस भवन का निर्माण व्यावसायिक उद्देश्य से किया जा रहा है, लेकिन नगर पालिका से इसकी स्वीकृति नहीं ली गई है। इसी प्रकार, वार्ड 7 सिंधी कॉलोनी में अंजू द्विवेदी द्वारा व्यावसायिक भवन के लिए तलघर का निर्माण किया जा रहा था, जिससे आसपास के भवनों को ढहने का खतरा पैदा हो गया था। इसके अलावा, पुराने पत्रा नाका चौराहा पर अंचल शुक्ला द्वारा एक दुकान के नीचे बेसमेंट निर्माण कराया गया है, जिसमें पानी भरा हुआ है, और यह भी बिना अनुमति के किया गया है।
कहीं न कहीं प्रभावशाली लोगों का संरक्षण
इन अवैध निर्माणों के पीछे एक बड़ी वजह प्रभावशाली लोगों का संरक्षण भी माना जा रहा है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद नगर पालिका और राजस्व विभाग इस पर कार्रवाई करने में असमर्थ रहे हैं। शिकायतों के बावजूद अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, क्योंकि कुछ निर्माणकर्ता नेताओं और प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में काम कर रहे हैं। इसके अलावा, बिल्डरों द्वारा इन तलघरों को बिल्डिंग एरिया से कवर कर दिया जाता है, जिससे यदि किसी भवन में आग लगने की घटना होती है, तो फायर ब्रिगेड को हालात पर काबू पाने में समस्या होती है।
टीएंडसीपी से अनुमति जरूरी
नगर पालिका के अधिकारियों के अनुसार अब से नगर में कहीं भी तलघर निर्माण नहीं किया जा सकता, अगर नहीं तो इसके लिए टीएंडसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से भी अनुमति लेना जरूरी है। लेकिन यह देखा जा रहा है कि तलघर के निर्माण में एक तरह से नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों का संरक्षण दिया जा रहा है, जिसके चलते इन निर्माण कार्यों पर रोक लगाने में प्रशासन की कार्यवाही ढीली पड़ रही है।