scriptKodia Shivdham: 300 साल पहले मिला था भूईंफोड़ शिवलिंग, कुएं की खुदाई के दौरान प्रकट हुए थे महादेव | Shivalinga was found 300 years ago by earth shattering, Mahadev | Patrika News
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Kodia Shivdham: 300 साल पहले मिला था भूईंफोड़ शिवलिंग, कुएं की खुदाई के दौरान प्रकट हुए थे महादेव

Mahashivratri 2025: धमधा मार्ग पर करीब 21 किमी दूर ग्राम कोड़िया में स्थित शिवधाम में स्थापित ज्योतिर्लिंग स्थापित नहीं बल्कि स्वयं प्राकट्य है। इस शिवलिंग के उद्भव की कहानी दिलचस्प है।

भिलाईFeb 26, 2025 / 01:05 pm

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Mahashivratri 2025: 300 साल पहले मिला था भूईंफोड़ शिवलिंग, कुएं की खुदाई के दौरान प्रकट हुए थे महादेव
Mahashivratri 2025: करीब 300 साल पहले गांव की प्यास बुझाने के लिए कुएं की खुदाई के दौरान मिले शिवधाम कोड़िया का भूईं फोड़ शिवलिंग अब क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है। यहां पर्व विशेष ही नहीं, सामान्य दिनों में भी सैकड़ों की संख्या में शिवभक्त पहुंचते हैं।

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दुर्ग जिला मुख्यालय से धमधा मार्ग पर करीब 21 किमी दूर ग्राम कोड़िया में स्थित शिवधाम में स्थापित ज्योतिर्लिंग स्थापित नहीं बल्कि स्वयं प्राकट्य है। इस शिवलिंग के उद्भव की कहानी दिलचस्प है। बताया जाता है कि करीब 300 साल पहले मालगुजारी के शासन काल में गांव में पीने के पानी की बड़ी समस्या थी। गांव का एक कुनबा पानी की व्यवस्था की गुहार लगाने मालगुजार के पास गया।
मालगुजार ने स्थल चयन कर कुआं खोदने कहा और इसके खर्च का वहन खुद करने का भरोसा दिलाया। इस पर लोगों ने गड्डानुमा भूमि पर कुआं खोदना प्रारंभ किया। कुछ गहराई में भूरे लाल रंग का गोल आकृति का पत्थर दिखाई दिया। इसे निकालने का काफी प्रयास किया गया। इसके चारों ओर गहरा खोदा गया, लेकिन सारे प्रयास विफल हो गए और पत्थर हिला तक नहीं। कुछ जानकारों ने इसे देव प्रतिमा होना बताया और इसके बाद खुदाई बंद कर दी गई। तब पास ही दूसरी जगह पर कुआं खोद लिया गया।
स्थानीय लोगों की मानें तो खुदाई के दौरान शिवलिंग करीब नारियल के आकार में मिला था, लेकिन यह कालांतर में बढ़ता गया और अब काफी बड़ा हो गया है। शिवलिंग को ध्यान से देखने पर सामने की ओर ऊँ अंकित दिखाई देता है। इसे उभरे हुए कुछ ही वर्ष हुए हैं।
इसे देव प्रतिमा मानने वाले लोग जल चढ़ाने लगे और मनौतिया मानने लगे। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की संया बढ़ती गई और महाशिरात्रि में मेला लगने लगा। लोगों की आस्था देख स्थानीय मालगुजार ने यहां छोटा मंदिर बनवा दिया।

शिवलिंग में दिखाई देता है ऊँ की आकृति

स्थानीय लोगों के मुताबिक अब शिवलिंग का आकार बढ़ना बंद हो गया है, लेकिन पहले हल्की और कम धारिया अब बड़ी और गहरी हो गई है। शिवलिंग को ध्यान से देखने पर सामने की ओर ऊँ अंकित दिखाई देता है। इसे उभरे हुए कुछ ही वर्ष हुए हैं। इससे पहले ऐसी कोई भी आकृति या निशान नहीं दिखता था, केवल धारियां ही दिखाई देती थीं।

प्रदीप मिश्रा ने दी सहस्त्रत्ते्श्वर महादेव की संज्ञा

शिवधाम से विख्यात कोकड़ी में शिवभक्तों ने प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का शिव महापुराण आधारित कथा प्रवचन भी यहां करवाया था। तब कथा वाचक मिश्रा ने इस शिवलिंग की आकृति और स्वरूप को असाधारण तथा मनभावन बताते हुए इसे सहस्त्रत्ते्श्वर महादेव की संज्ञा दी थी और उन्होंने सहस्त्रत्ते्श्वर महादेव की कथा सुनाई थी। मंदिर परिसर में अब हर महाशिवरात्रि को विशाल मेला लगता है और प्रत्येक सोमवार को पूजा अर्चना करने वालों की कतार लगती है।

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