Trump Tarrif impact : भारत पर ‘ट्रंप टैरिफ’ सजा या उपहार, हिसाब लगाने में जुटी दुनिया, यहां समझिए
Reciprocal Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार के प्रेस कॉन्फेंस में 26 फीसदी टैरिफ की बात की थी, लेकिन बाद में जारी दस्तावेजों में यह 27 फीसदी बताया गया।
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 26 नहीं 27 फीसदी टैक्स लगाया है
Trump Tarrif impact on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए ‘पारस्परिक टैरिफ’ (Reciprocal Tax ) का दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। ट्रंप टैरिफ के नाम से चर्चित इस टैक्स के असर की आंकलन किया जा रहा है। हालांकि, जितने टैरिफ की आशंका थी, उससे कम लगने के कारण कई देशों ने राहत की सांस ली है। कुछ अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह सजा की तरह है तो कुछ के लिए वरदान की तरह। भारत में इस पर मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आ रही है। भारत में कपड़ा, फार्मा, मशीनरी कंपोनेंट और खिलौेना क्षेत्र को फायदा हो सकता है। दूसरी ओर रत्न और आभूषण (जेम्स एंड ज्वेलरी) सेक्टर पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने गुरुवार को बताया कि वाणिज्य मंत्रालय अमेरिका के नए टैरिफ आदेशों के निहितार्थों की सावधानीपूर्वक जांच कर रहा है।
अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश में सभी व्यापारिक साझेदारों से आयात पर 10 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त मूल्यानुसार शुल्क लगाया गया है। 10 प्रतिशत का बेसलाइन शुल्क 5 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगा और शेष देश-विशिष्ट अतिरिक्त मूल्यानुसार शुल्क 9 अप्रैल से प्रभावी होगा। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा कि भारत के लिए अतिरिक्त शुल्क 27 प्रतिशत है। हालांकि, ट्रंप ने बुधवार के प्रेस कॉन्फेंस में 26 फीसदी टैरिफ की बात की थी, लेकिन बाद में जारी दस्तावेजों में यह 27 फीसदी बताया गया।
भारत को यहां होगा फायदा
भारत का कपड़ा उद्योग सबसे ज्यादा फायदे में रहने वाला है। चीन (54%) और बांग्लादेश (37%) से आने वाले कपड़ों पर अमरीका के ज्यादा टैरिफ लगने से वहां भारतीय प्रोडक्ट सस्ते हो जाएंगे।
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातकों को फायदा हो सकता है, क्योंकि वियतनाम जैसे देशों पर अधिक टैरिफ लगने के कारण व्यापार भारत की ओर स्थानांतरित हो सकता है।
भारत की दवा उद्योग के लिए राहत मिली है। दवाओं को इन टैरिफ से छूट दी गई है। भारत से अमरीका को हर साल करीब नौ अरब डॉलर की दवा निर्यात होती है, जो इसका सबसे बड़ा औद्योगिक निर्यात क्षेत्र है।
अमरीका के टैरिफ से चीन और थाईलैंड से आने वाली मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और खिलौनों पर भी असर पड़ेगा। अगर भारत सही तरीके से काम करे तो वह इन क्षेत्रों में एक विकल्प बन सकता है।
यहां नुकसान होने की आशंका
भारत हर साल 11 अरब डॉलर की ज्वैलरी अमरीका को निर्यात करता है। ज्वैलरी निर्यात में इसका हिस्सा 30 फीसदी है। जेम्स एंड ज्वैलरी पर टैरिफ मौजूदा 5-7 फीसदी से 20 फीसदी से बढ़कर 27 हो जाएगा।
आइटी सेक्टर पर प्रत्यक्ष रूप से टैरिफ का असर नहीं पड़ा है, लेकिन अमरीका में महंगाई-मंदी की आशंका है। इससे भारतीय कंपनियों को सबसे अधिक नुकसान होगा। गुरुवार को आइटी इंडेक्स चार फीसदी गिरा।
भारतीय ऑटो एंसिलियरी कंपनियों के निर्यात में अमरीका का 16 फीसदी हिस्सा है। तैयार वाहनों के निर्यात में 5 फीसदी। अमरीका इनपर औसतन 2.4 फीसदी शुल्क ले रहा था, जो अब 25 फीसदी हो जाएगा।
18.15 करोड़ डॉलर मूल्य के डेयरी उत्पादों के निर्यात पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे अमरीका में भारतीय घी, मक्खन और दूध पाउडर महंगे हो जाएंगे। उनकी बाजार हिस्सेदारी कम होने की आशंका है।
अलग-अलग देशों ने क्या दी प्रतिक्रिया
ट्रंप टैरिफ से अमरीकी बाजारों में लगभग दो ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। एपल, नाइकी और वॉलमार्ट के शेयरों में बड़ी गिरावट आई।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांसीसी कंपनियों के साथ बैठक में उनसे अमेरिका में निवेश स्थगित करने का आह्वान किया है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कनाडा-अमेरिका-मैक्सिको समझौते का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा कि उनका देश ट्रंप टैरिफ से खुद को बचाने के लिए ‘सभी उचित उपाय’ करेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन नेअमरीका के इस कदम के ‘सेल्फ गोल’ करार दिया और कहा कि इससे अल्पावधि में अमरीका को नुकसान होगा।
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