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रायपुर के वर्ष 2001 से 21 तक भूजल स्तर के डाटा को एनालिसिस कर बताया गया है कि भूजल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है, जो भूजल संसाधनों की निरंतर कमी को दर्शाती है। यानी समय के साथ जल स्तर में गिरावट की दर बढ़ रही है। रायपुर में वर्ष 2001 से 2006 में भूजल स्तर जमीन से 108 फीट और वर्ष 2017-21 में 119.66 फीट नीचे था, जो अब कई इलाकों में 1000 फीट भी पार हो गया है।
शासन स्तर पर हो कार्य एक्सपर्ट के अनुसार, राजधानी में राज्य सरकार की ओर से वाटर लेवल मापने के लिए एक भी पीजोमीटर नहीं लगवाया गया। जिसके कारण मॉनीटरिंग नहीं हो रही और राज्य प्रशासन के पास कोई खास जानकारी नहीं होती। सरकार को शहर के अलग-अलग इलाकों में वाटर लेवल मापने पीजोमीटर लगावाने चाहिए। अभी सेंट्रल बोर्ड के लगभग दो पीजोमीटर ही हैं। शासन को भी पानी के गिरते स्तर पर ध्यान देते हुए कड़े कायदे लाकर गंभीरता से इस पर काम करना चाहिए।
पूरा एरिया कंक्रीट होने से पानी सर्क्यूलेट नहीं हो पा रहा कल सड्डू एरिया में पानी 1100 फीट में भी नहीं आया। पूरा एरिया कांक्रेट हो गया है और सील पत्थर होने के कारण पानी सर्कुलेट नहीं कर पा रहा। यहां मिट्टी एरिया भी नहीं मिल रहा है जिससे पानी रिचार्ज हो। शहर में इस साल वाटर लेवल बहुत नीचे गया है। हम नहीं चेते तो बैगलुरु जैसी स्थिति हो सकती है। – डॉ. के. पाणिग्रही, भूजल वैज्ञानिक
इन कारणों से गिर रहा वाटर लेवल 2024 में आईजीकेवी की एक रिपोर्ट इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित हुई थी। इसके अनुसार, देश में 2050 तक सालाना प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 1140 घन मीटर हो सकती है। जो कि 2001 में 1816 क्यूब मीटर, 2011 में 1545 क्यूब मीटर और 2021 में 1367 घनमीटर थी। इसमें भी लगातार प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता कम होती दिखाई दे रही है। 1,000 घनमीटर से कम की वार्षिक प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता को जल अभाव की स्थिति माना जाता है।
इंडस्ट्री द्वारा बोर से ही पानी लेने, बोरवेल की लगातार संया बढ़ने, शहरीकरण, वाटर हार्वेस्टिंग नहीं होने, अत्यधिक पानी का दोहन जैसे कई कारणों से वाटर लेवल नीचे जा रहा है। ऐसे में हर आम और खास को सोचना चाहिए कि वे अपना भविष्य कहां देखते हैं। अपने स्तर पर पानी की बचत करनी चाहिए।
जानें… किन एरिया में कितने फीट पर पानी सड्डू: वर्ष 2010 में 400 फीट की गहराई पर पानी था। अब सड्डू के कई इलाकों में 1100 फीट नीचे भी पानी नहीं मिल रहा है।
भनपुरी: यहां वर्ष 2015 में 600 फीट पर पानी मिलता था, अब 900-1000 फीट नीचे पानी चला गया है। मोवा: पिछले साल तक यहां 270 फीट पर पानी मिलता था, लेकिन इस साल 925 फीट पर पानी मिल रहा है।
अवंति विहार: पहले यहां 500 फीट पर पानी होता थी, अब 700-800 फीट चला गया है। निमोरा: यहां भी अभी पानी 750 फीट से ज्यादा की खुदाई पर पानी मिल रहा है। राजेंद्र नगर: यहां पहले लगभग 400 फीट नीचे पानी था, अब 700-800 फीट से नीचे पहुंच गया है।
शांति नगर: पहले 300 फीट पर, अब 450-500 फीट नीचे है पानी।