ममता ने फिर महाकुंभ की व्यवस्था पर उठाए सवाल
ममता ने महाकुंभ को “मृत्यु कुंभ” कहकर इसकी आलोचना की और कहा, “यह ‘मृत्यु कुंभ’ है। मैं महाकुंभ का सम्मान करती हूं, मैं पवित्र गंगा मां का सम्मान करती हूं। लेकिन कोई योजना नहीं है। कितने लोगों को बचाया गया?” उन्होंने खराब योजना और भगदड़ का जिक्र किया। बाद में उन्होंने सफाई दी, “मैंने कभी महाकुंभ में पवित्र स्नान करने वाले तीर्थयात्रियों के बारे में नहीं कहा, मैं उनका सम्मान करती हूं। मैं वहां की व्यवस्था और तैयारी की बात कर रही हूं। अगर योजना नहीं होगी, तो लोग पीड़ित होंगे। मैं योगी सरकार से अपील करती हूं कि 2025 महाकुंभ भगदड़ में मारे गए लोगों को मुआवजा दिया जाए।” उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की। मिथुन चक्रवर्ती ने अपने बयान, “70 करोड़ लोग यहां आए और पवित्र स्नान किया,” के जरिए महाकुंभ में 70 करोड़ लोगों की मौजूदगी पर जोर दिया, जिससे उन्होंने आयोजन के विशाल पैमाने और धार्मिक महत्व पर जोर दिया। वहीं, ममता बनर्जी ने अपनी बात को दो हिस्सों में रखा। पहले, उन्होंने कहा, “144 साल बाद महाकुंभ आएगा। यह सही नहीं है,” और हर साल होने वाले पुण्य स्नान का जिक्र करते हुए गंगासागर मेले का उदाहरण दिया। दूसरे, उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाया, “यह ‘मृत्यु कुंभ’ है… कोई योजना नहीं है,” और भगदड़ की घटना के चलते तैयारियों को लेकर उठे सवालों का जिक्र किया।