मेड़ता सिटी। देश चाहे कोई भी हो राजस्थानी संस्कृति की महक और झलक देखने को मिल ही जाती है। राजस्थान एसोसिएशन ने अपनी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी लंदन में गणगौर उत्सव 2025 का आयोजन किया। इस महोत्सव में न केवल राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली, बल्कि अन्य राज्यों की सहभागिता ने भी आयोजन की भव्यता को चार चांद लगा दिए।
गणगौर उत्सव यानी ‘कुनबों’ को लेकर सुबह से ही चहल-पहल दिखने लग गई थी। सुबह-सुबह सौलह शृंगार में सज-धजकर आई महिलाएं गौर का ही रूप लग रही थी। सजी-धजी महिलाओं ने गणगौर माता का पारंपरिक पूजन किया व मंगलगीत गाते हुए सौभाग्य और समृद्धि की कामना की व सूर्यदेव को अर्घ्य दिया।
ढोल बिट्स यूके बैंड के ढोल-ताशों की गूंज और राजस्थानी लोक धुनों के साथ गणगौर माता की विशेष सवारी निकाली गई। महिलाओं ने घाघरा-चोली, पुरुषों ने पगड़ी, कुर्ता-धोती और बच्चों ने रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्र धारण किए। पटाखों की आवाज और हर तरफ गुलाल से वातावरण राजस्थानी संस्कृति में रंग गया। वहीं बच्चों ने भगवान राम-सीता, हनुमान, कृष्ण और गणेश सहित देवी-देवताओं की झाँकियां प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रस्तुतियों ने राजस्थानी लोक संस्कृति को किया जीवंत
गणगौर उत्सव में साखिया ग्रुप ने राजस्थानी लोकगीतों की संगीतमय प्रस्तुति दी। वसुंधरा एवं दीपाली ने घूमर गीत और सुरभि ने घेर दार घाघरो गीत’ पर लोक नृत्य प्रस्तुत करके कार्यक्रम में रौनक बढ़ा दी। वहीं महा घूमर में महिलाओं ने पारंपरिक घूमर नृत्य प्रस्तुत कर राजस्थानी लोकसंस्कृति को जीवंत कर दिया। गणगौर महोत्सव में पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों का विशेष इंतजाम किया गया। मेहमानों ने पनीर की सब्जी, आलू-मटर की सब्जी, कड़ी, लापसी, चावल, पूड़ी सहित व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया।