पिछले साल जुलाई में अंतरिम बजट में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना (Mukhyamantri Ladki Bahin Yojana) की घोषणा की थी। इसके तहत 21 से 65 साल की पात्र महिलाओं के खातों में हर महीने 1500 रुपये जमा किए जा रहे हैं। अब तक 9 किस्तें दी जा चुकी हैं। लेकिन इस योजना की वजह से सरकार के खजाने पर भारी बोझ पड़ने की बात भी सामने आ रही है।
चुनाव से पहले महायुति सरकार के नेताओं ने लाडकी बहिन योजना की राशि को 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये करने का वादा किया था। माना जाता है कि यह योजना नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी नीत महायुति गठबंधन के लिए गेमचेंजर साबित हुई थी। महायुति को प्रचंड जीत मिली और महायुति सरकार फिर से सत्ता में आई। लेकिन अब तक लाडली बहनों को वादे के मुताबिक लाभ नहीं मिला है, जिससे लाभार्थी महिलाओं में नाराजगी देखी जा रही है।
उधर, इस मुद्दे पर विपक्षी महाविकास आघाडी (MVA) गठबंधन भी सरकार को घेर रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना की वजह से राज्य सरकार का खजाना खाली हो गया है और राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। सरकार अन्य योजनाओं के बजट को लाडली बहना योजना (लाडकी बहीण योजना) में ट्रांसफर कर रही है, जिसके कारण कई जन कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हुई हैं। वहीँ विपक्ष का दावा है कि 2100 रुपये देने का वादा सिर्फ चुनावी जुमला था।
राज्य के बजट सत्र में इस पर घोषणा होने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनकी कैबिनेट के मंत्रियों ने बार-बार यह आश्वासन दिया है कि योजना बंद नहीं होगी और जल्द ही 2100 रुपये की राशि लाडली बहनों को मिलेगी।
अजित पवार ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना की राशि को 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये करने को लेकर राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बड़ा बयान दिया है। बीड जिले के दौरे पर गए वित्तमंत्री अजित पवार ने कहा, लाडली बहनों को फिलहाल 1500 रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन जब आर्थिक हालात सुधरेंगे, तब इसे बढ़ाने के संबंध में जरुर फैसला लिया जाएगा। अजित पवार के इस बयान से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि लाडली बहनों को 2100 रुपये की किस्त कब से मिलेगी, यह कोई नहीं जानता। हालांकि इस योजना ने विधानसभा में महायुति को बड़ी सफलता दिलाई है, लेकिन अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो आगामी निकाय चुनावों में जनता की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।