scriptMadan Dilawar: आंकड़े देख भड़के मदन दिलावर, अधिकारियों से कहा- काम शुरू कर दो, पुराने पाप धुल जाएंगे, वरना… | Minister Madan Dilawar held a meeting with officials regarding cleanliness in Kota Gram Panchayats | Patrika News
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Madan Dilawar: आंकड़े देख भड़के मदन दिलावर, अधिकारियों से कहा- काम शुरू कर दो, पुराने पाप धुल जाएंगे, वरना…

मंत्री मदन दिलावर बुधवार को कोटा में स्वच्छ भारत मिशन, अन्नपूर्णा रसोई तथा घुमंतू एवं अर्ध घुमंत जाति के आवास विहीन व्यक्तियों को पट्टा आवंटन अभियान को लेकर आयोजित पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक में हिस्सा ले रहे थे।

कोटाApr 02, 2025 / 07:58 pm

Rakesh Mishra

Madan Dilawar
Madan Dilawar: राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ग्राम पंचायतों में स्वच्छता को लेकर काफी गंभीर और सख्त नजर आए और अधिकारियों की ओर से प्रस्तुत स्वच्छता अभियान के आंकड़ों पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि जो आंकड़े पेश किए गए वह झूठे हैं। धरातल पर यह आंकड़े ठीक नहीं, जो अधिकारी झूठे आंकड़े तैयार कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

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समीक्षा बैठक में लिया हिस्सा

दिलावर बुधवार को राजस्थान के कोटा में स्वच्छ भारत मिशन, अन्नपूर्णा रसोई तथा घुमंतू एवं अर्ध घुमंत जाति के आवास विहीन व्यक्तियों को पट्टा आवंटन अभियान को लेकर आयोजित पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुझे झूठे आंकड़े पेश करना बिल्कुल भी पसंद नहीं। मैं अब तक प्रदेश की 50 ग्राम पंचायत का आकस्मिक निरीक्षण कर चुका हूं। दो या तीन पंचायत को छोड़ दें तो किसी भी पंचायत में राज्य सरकार के स्वच्छता अभियान को लेकर आदेशों की अक्षर से पालन नहीं हो रही है। केवल घालमेल किया जा रहा है। कुछ के खिलाफ मैंने कार्रवाई की है। आगे भी सख्त कार्रवाई करूंगा।

अधिकारियों से किए सवाल

उन्होंने सवाल किया कि छोटी से छोटी पंचायत में कम से कम 80 हजार रुपए से लेकर अधिकतम 40 लाख रुपए तक सालाना सफाई के लिए दिए जा रहे हैं। फिर यह पैसा जाता कहां है? सफाई क्यों नहीं होती, जिसने भी सफाई मद के पैसे से निर्माण कार्य किया है, उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते हुए पैसे वसूल किए जाएंगे। जिस अधिकारी ने निर्माण कार्य स्वीकृत किया होगा, उससे भी वसूल किया जाएगा। बहाने बनाते हैं, सफाई तो की थी, लेकिन दिख नहीं रही, सफाई हुई नहीं तो फिर दिखेगी कैसे।

अधिकारियों को दी चेतावनी

उन्होंने कहा कि मैं गांव में जाता हूं, पूछता हूं तो लोग कहते हैं कि पंचायत झाड़ू भी निकलवाती है, यह तो हम पहली बार सुन रहे हैं। अभी तक तो हम ही पैसे देकर झाड़ू निकलवा रहे हैं। गांव में लोग गंदगी के कारण बीमार होकर मर रहे हैं और हम पैसा निर्माण कार्य पर खर्च कर रहे हैं। ऐसा करके हम पाप के भागीदार बन रहे हैं, लेकिन अब कोई भी नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि अब भी आप काम करवाना शुरू कर दो, तो पुराने पाप धुल जाएंगे। अगर अब भी नहीं सुधरे तो पूरे पांच साल का पैसा जांच कर वसूल लूंगा।

सबका सहयोग जरूरी: दिलावर

उन्होंने सलाह दी कि एक बार अभियान चलाकर पूरी पंचायत को साफ कर लो, उसके बाद नियमित सफाई शुरू करो। गांव में रोज झाड़ू निकालना चाहिए, कीचड़ और कचरा नहीं होना चाहिए। रोज गाड़ी घर-घर कचरा लेने आनी चाहिए। टेंडर में भी गाड़ी से कचरा संग्रहण करने का पैसा शामिल है फिर गाड़ी क्यों नहीं लगा रहे हैं? जो ठेकेदार टेंडर शर्तों के मुताबिक गाड़ी नहीं लग रहा है, उसका पैसा काटो। यदि सप्ताह में तीन दिन ही सफाई कर रहा है, तो उसका शेष दिन का पैसा भी भुगतान मत करो। उन्होंने कहा कि मुझे एक साल के अंदर पूरा राजस्थान देश में नंबर वन स्वच्छ चाहिए और इस काम में आप सब का सहयोग जरूरी है।

‘मैं तुम्हारा रक्षा कवच’

दिलावर ने बैठक में जिला प्रमुखों, पंचायत समिति प्रधानों और सरपंचों को संबल देते हुए कहा कि सही काम करोगे तो मैं तुम्हारा रक्षा कवच हूं, कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता, लेकिन गलत काम करोगे, सीधी कार्रवाई करूंगा, एक को भी नहीं छोडूंगा फिर चाहे वह कोई भी हो। उन्होंने यूआईटी ऑडिटोरियम में कोटा संभाग के उपस्थित तमाम पंचायती राज विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को गत दिनों सुल्तानपुर में तीन पंचायत के किए गए आकस्मिक निरीक्षण की घटना के बारे में भी बताया।
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उन्होंने कहा कि जब वह सुल्तानपुर की तीन पंचायत का निरीक्षण किया और वहां उन्हें गंदगी मिली तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई, तो अगले दिन वो सब सांगोद के विधायक एवं ऊर्जा मंत्री हीरालाल नगर के पास पहुंच गए और मेरी शिकायत करते हुए कहा कि सरकार सफाई के लिए पैसे तो देती नहीं है, पंचायत के पास अपना पैसा है नहीं, सफाई कैसे हो। ऊपर से मंत्री कारवाई कर देते हैं।
इस बात को लेकर ऊर्जा मंत्री और मेरे बीच हॉट टॉक हो गई। मंत्री मानने को ही तैयार नहीं थे, तब मैंने ऊर्जा मंत्री को सारी लिस्ट भेजी और बताया कि सरकार कितना-कितना पैसा दे रही है, तब ऊर्जा मंत्री ने भी स्वीकार किया कि उनको गलत जानकारी दी गई। सरपंच पंचायत में सफाई के लिए पैसा नहीं होने की झूठी जानकारी क्षेत्र के विधायकों को देते हैं।

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