प्रतियोगिता में भाग ले रही महिलाओं ने कहा, राजस्थान की धरती वीरों की भूमि रही है। महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और राणा सांगा जैसे वीर योद्धाओं ने इस भूमि को गौरवान्वित किया है। यहां के किले और महल इसकी ऐतिहासिक विरासत को दर्शाते हैं। युद्ध और बलिदान की कहानियां आज भी राजस्थान की हवाओं में गूंजती हैं।
महिलाओं ने अपने भाषण में कहा कि राजस्थानी भोजन अपने स्वाद और विशेष व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है। दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, केर-सांगरी, मिर्ची बड़ा और प्याज कचौरी यहां के प्रसिद्ध व्यंजनों में शुमार हैं। ये व्यंजन राजस्थान की समृद्ध खान-पान परंपरा को दर्शाते हैं।
कुचेरा की इंदिरा बाघमार ने प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया। समदड़ी की बन्टी पालरेचा दूसरे एवं समदड़ी की ममता पालरेचा तीसरे स्थान पर रही। कुचेरा की सपना बाघमार को प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया। नीकिता राजपुरोहित प्रतियोगिता की निर्णायक थीं। प्रारम्भ में राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोक सिंह राजपुरोहित ने पत्रिका के सामाजिक सरोकार एवं प्रतियोगिता के बारे में जानकारी दी।