राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने भले ही ष्एक जिला एक खेलष् योजना जैसी अन्य योजनाएं चला रही हैए लेकिन जब जिलों में खेल अधिकारी से लेकर प्रशिक्षक तक न हो तो उस जिले के खेल और खिलाडि?ों का भविष्य कैसे उज्जवल हो सकता है। धौलपुर खेल विभाग में पिछले 13 सालों से खेल अधिकारी का पद रिक्त है। जिला खेल पदाधिकारी का पद खाली रहने से जिले के बच्चे जिला और राज्य स्तर के खेलों में कम भाग ले पा रहे हैंए क्योंकि उन्हें विद्यालय स्तर से ऊपर की गतिविधियों में भाग लेने के लिए खेलों का आयोजन समय पर नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा खेल स्टेडियम के विकास और रखरखाव का काम भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। विभाग के हालात यह हैं कि धौलपुर जिला खेल विभाग का जिम्मा इन दिनों रिटायर्ड अधिकारी का दे रखा है।
2012 के बाद से पद रिक्त धौलपुर खेल विभाग को आखिरी बार 2010 में नियमित खेल अधिकारी रमेश चंद बुंदेला के रूप में मिला था। जो 2012 तक इस पद आसीन रहे। लेकिन तब से अब तक सरकार जिला को कोई भी नियमित खेल अधिकारी नहीं दे सका। दे सका तो सिर्फ कार्यवाहक अधिकारी। ऐसा नहीं है कि इन सालों में यहां किसी खेल अधिकारी को नहीं लाया गया हो। दो बार अधिकारियों का यहां स्थानांतरण किया गया थाए लेकिन दोनों ही बार दोनों अधिकारियों ने यहां के बजाय दूसरा विकल्प चुना।
जब नहीं द्रोणाचार्य तो कैसे निकलेंगे एकलव्य सरकार जहां खेलों को बढ़ावा देने के नाम पर सिर्फ डंका पीटने का ही कार्य कर रही है। जिसका ही नतीजा है कि राजस्थान में खेलों का ढांचा कमजोर होता जा रहा है। जहां राज्य के कई जिलों में खेल अधिकारी से लेकर प्रशिक्षक तक नहीं हैं। यानी जब द्रोणाचार्य ही नहीं होंगे तो हम एकलव्य की परिकल्पना कैसे कर सकते हैं। हां केवल ठेकेदारों के माध्यम से अस्थाई कोच बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनमें कोई समय पर आ रहा है तो कोई नहीं आ रहा। वेतन कम होने के कारण वे भी ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे।
भर्ती निकली, लेकिन रही अधूरी वर्ष 2023 में खेल कोच के 128 पदों पर भर्ती निकाली गई। इसके लिए 28 सितम्बर 2023 को नोटिफिकेशन जारी किया गया। दस से तीस अक्टूबर तक आवेदन लिए गए। लेकिन इसके बाद चुनाव आचार संहिता लग गई। सरकार बदल गई। भर्ती फाइलों में दब गई।
इंडोर स्टेडियम से खिलाडिय़ों को उम्मीदें धौलपुर की धरा को खेल सितारों की जननी कहा जाता है। यहां हॉकीए बेडमिंटन से लेकर क्रिकेट तक के कोहिनूर निकले हैं। जिनको अपना आइडल मानकर जिले के बच्चे खेलों में अपना भविष्य देख रहे हैं। लेकिन सीमित संसाधानए अव्यवस्थाओंए खेल अधिकारी से लेकर बेहतर खेल प्रशिक्षकों की कमी उनके सपने तोडऩे को बेकरार है। हालांकि बड़ी फील्ड पर बनने वाले इंडोर स्टेडियम से खेल प्रेमियों को काफी सहूलियत मिलेंगी। इंडोर स्टेडियम में जहां हॉकी से लेकरए टेनिसए टेबल टेनिस सहित अन्य खेलों का प्रशिक्षण मिलेगा।
दु:ख होता है जिस धरा ने खेल के अनमोल रत्न दिए वहां खेल आज इस स्थिति में है। खेल अधिकारी का पद पिछले कई सालों से रिक्त है। तो प्रशिक्षण देने वाले भी नियमित प्रशिक्षक नहीं हैं। जिससे होनहार खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन के साथ नई तकनीक से प्रशिक्षण भी नहीं मिल पा रहा है। जिससे धौलपुर जिला में खेलों की सिर्फ दुर्गति हो रही है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
– शैलेन्द्र सिंह बोहरा, अध्यक्ष जिला हॉकी संघ धौलपुर इतने प्रशिक्षक दे रहे प्रशिक्षण खेल प्रशिक्षकहैंडवॉल 01फुटबॉल 02कुश्ती 01तीरंदाजी 01हॉकी 01 (एनजीओ के जरिए प्रशिक्षक)—— इतने बच्चे ले रहे प्रशिक्षण
खेल खिलाड़ीफुटबॉल 60हैंडबॉल 40कुश्ती 40हॉकी 35तीरंदाजी 10