शव लेने के लिए बुधवार सुबह खातेगांव के प्रशासनिक अधिकारियों की टीम डीसा पहुंची थी। कागजी खानापूर्ति के बाद सुबह करीब 8.30 बजे 6 एम्बुलेंस में 10 शव को लेकर अधिकारी खातेगांव के लिए रवाना हुए। रास्ते में अधिक ट्रैफिक और लंबी दूरी होने के कारण शव का शाम तक खातेगांव व संदलपुर पहुंचना मुश्किल था। इसके चलते परिजन ने सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। ऐसे में सभी शवों को रात में इंदौर के एमवाय अस्पताल की मर्चूरी में रखा गया। गुरुवार सुबह शवों को संदलपुर व खातेगांव लाया जाएगा। इसके बाद नेमावर में सभी का अंतिम संस्कार किया जाएगा जहां प्रशासन द्वारा तैयारियां की गई है।
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हादसे में संदलपुर के लखन पिता गंगाराम (24), उसकी पत्नी सुनीता(20), मां केशरबाई (50), बहन राधा (11), रुकमा (8), भाई अभिषेक की मौत हुई। वहीं इनके रिश्तेदार राकेश पिता बाबूलाल भोपा (30), उसकी पत्नी डॉली (25), बेटी किरण (5) की मौत हुई है। वहीं राकेश की एक बेटी नैना (2) घायल हुई है। हादसे में खातेगांव के पंकज सांकलिया की भी मौत हुई है।
एम्बुलेंस में ही करेंगे अंतिम दर्शन
बुधवार को विधायक आशीष शर्मा, एसडीएम प्रिया चंद्रावत सहित अधिकारी संदलपुर पहुंचे और मृतकों के परिजनों से चर्चा की। इस दौरान परिजनों ने आग्रह किया कि कम से कम अंतिम दर्शन के लिए शवों को दिखा दें। इस पर उन्हें बताया कि शव क्षत-विक्षत हालत में हैं। ऐसे में तय किया गया कि एम्बुलेंस में ही अंतिम दर्शन करवाकर शवों को अंतिम संस्कार के लिए नेमावर ले जाया जाएगा।