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दौसा

Rajasthan News: राजस्थान में यहां शहरी सीमा का बढ़ा दायरा, चुनाव में भी बदलेंगे समीकरण

Dausa nagar parishad: देवनगरी दौसा में तेजी से होते आबादी विस्तार के बीच अब स्वायत्त शासन विभाग ने आखिरकार शहरी सीमा का दायरा बढ़ा दिया है।

दौसाMar 27, 2025 / 02:10 pm

Anil Prajapat

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दौसा। देवनगरी दौसा में तेजी से होते आबादी विस्तार के बीच अब स्वायत्त शासन विभाग ने आखिरकार शहरी सीमा का दायरा बढ़ा दिया है। इस संबंध में स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक इन्द्रजीत सिंह ने आदेश जारी किए है। शहरी सीमा का दायरा बढ़ने से चुनाव में समीकरण बदलना भी तय है। पिछले कई दिनों से शहरी सीमा का दायरा बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही थी।
दौसा नगर परिषद क्षेत्र में आसपास के 15 गांवों को शामिल किया गया है। वर्तमान में दौसा नगर परिषद बोर्ड में कांग्रेस काबिज है। नए वार्डों के जुड़ने से राजनीतिक व जातिगत समीकरण बदलेंगे। निकाय में एससी-एसटी के सदस्यों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसके चलते नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे।

ये गांव दौसा नगर परिषद क्षेत्र में शामिल

सरकार ने अब दौसा नगर परिषद क्षेत्र में ग्राम पंचायत गणेशपुरा का राजस्व ग्राम गणेशपुरा का सपूर्ण सीमा क्षेत्र, ग्राम पंचायत महेश्वरा खुर्द का राजस्व ग्राम महेश्वरा खुर्द और बाढ दौसा, ग्राम पंचायत सूरजपुरा का राजस्व ग्राम ढगलाव और नामोलाव, ग्राम पंचायत सिंगवाडा का राजस्व ग्राम दलेलपुरा, ग्राम पंचायत हरिपुरा का राजस्व ग्राम मोडापट्टी और हरिपुरा, ग्राम पंचायत चावंडेडा का राजस्व ग्राम रूगली, रायपुरा, ग्राम पंचायत जीरोता खुर्द का राजस्व ग्राम जीरोता कलां और ग्राम पंचायत खान भांकरी का राजस्व ग्राम भांकरोटा व भांकरी को शामिल किया गया है। हालांकि शहर के समीप कई गांवों को शामिल नहीं करने से राजनीतिक चर्चाओं का दौर चल पड़ा है।

फैसले से फायदा

-गांवों में राजनीति के हिसाब से विकास कार्य में आने वाले पेच दूर हो सकेंगे।
-शहर की आबादी के हिसाब से घोषित होने वाली योजनाओं व बजट से शहरी क्षेत्र में शामिल होने वाली गांव-ढाणियों के लोगों को फायदा मिल सकेगा।
-ग्राम पंचायतों के शहरी सीमा में आने पर रियल एस्टेट को और ज्यादा बूम मिलने की संभावना मिल सकेगी।

ये नुकसान संभव

-मनरेगा जैसी योजनाएं बंद होने से गांव के लोगों को शहरी रोजगार गांरटी योजना में कम विकल्प मिलने से नुकसान।-ग्रामीणों को जन्म-मृत्यु जैसे छोटे-छोटे प्रमाण पत्रों के लिए शहरी सीमा में चक्कर लगाने पड़ेंगे।
-शहरी क्षेत्र के बजट के मुकाबले ग्राम पंचायतों का बजट काफी ज्यादा, ग्रामीण विकास की योजनाएं बंद हो जाएंगी।
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वार्डों की संख्या बढ़ने पर संशय

गांवों को जोड़ने से शहरी क्षेत्र में वार्ड बढ़कर 70-80 होने की चर्चा है, लेकिन इसमें गत दिनों जारी एक आदेश का पेच है। वार्ड परिसीमन को लेकर 13 फरवरी को जारी आदेश में बताया गया था कि 2011 की जनगणना के अनुसार 80 हजार से 1 लाख तक की आबादी वाले निकाय में 55 वार्ड तथा 1 से 2 लाख तक आवाबादी वाले निकाय में 60 तथा 2 से 3.50 लाख तक 65 वार्ड होंगे।
वर्ष 2011 में दौसा शहर की जनगणना 85 हजार 960 थी और जिन नए गांवों को शामिल किया है उनमें जनसंख्या 13 हजार 866 है। इस तरह 99 हजार 826 जनसंख्या हो रही है। आदेश के अनुसार वार्डों की संख्या तय हुई तो पूर्व की भांति 55 वार्ड ही रहेंगे, वोटर व क्षेत्र बढ़ सकता है। वहीं आदेश में यह भी लिखा है कि सभी वार्डों की जनसंख्या का अनुपात समान हों यह संभव नहीं है, इसलिए इसके समायोजन में आनुपातिक सीमा से जनसंख्या 15 प्रतिशत अधिक अथवा कम हो सकती है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह बिंदु वार्ड की जनसंख्या को लेकर है या पूरे नगर परिषद क्षेत्र को लेकर है।

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