लाइव 01
सुबह 10.50 बजे शासकीय प्राथमिक पाठशाला नरसिंहगढ़ पुरवा में जब शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन शुरू हुआ, तो यहां हालात कुछ और ही थे। विद्यालय में केवल दो बच्चे उपस्थित थे और शिक्षक भी वहां मौजूद थे, लेकिन बच्चों की संख्या इतनी कम थी कि कार्यक्रम का उत्साह काफी फीका रहा। इस मौके पर शिक्षक ने बच्चों का स्वागत किया और उन्हें अच्छे से पढ़ाई करने की प्रेरणा दी, लेकिन शाला की स्थिति ने यह साफ कर दिया कि यहां बच्चों की उपस्थिति में कमी रही। शिक्षक ने उम्मीद जताई कि अगले कुछ दिनों में बच्चों की उपस्थिति बेहतर होगी और उत्सव का माहौल गर्माएगा।
लाइव 02
सुबह -10.58 शासकीय माध्यमिक शाला डेरा पहाड़ी में भी उत्सव का आयोजन किया गया, लेकिन यहां स्थिति थोड़ी और विचित्र थी। इस स्कूल में बच्चों की संख्या बहुत कम थी और अधिकांश बच्चे कक्षा में नहीं थे। बच्चे बाहर पेड़ के नीचे खेल रहे थे और कक्षा में उनका आना-जाना न के बराबर था। शिक्षक बच्चों को कक्षा में लाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बच्चे पेड़ के नीचे खेलने में ज्यादा रुचि रखते थे। यह दृश्य इस बात को साबित करता है कि स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बहुत कम रही, जिससे कार्यक्रम में वह उल्लास और जोश नहीं दिखा जो अन्य स्कूलों में था।
लाइव-03
सुबह 11.15 बजे शाला प्रवेशोत्सव के इस पहले दिन का उत्सव अपने चरम पर पहुंचा जब 11.15 बजे उत्कृष्ट विद्यालय क्रमांक 1 में यह आयोजन हुआ। यहां पर बच्चों को तिलक लगाकर स्वागत किया गया और पूरा वातावरण उल्लास से भर गया। बड़ी संख्या में शिक्षक और बच्चे इस उत्सव में शामिल हुए। बच्चे, शिक्षक और अभिभावक सभी ने मिलकर उत्सव को धूमधाम से मनाया। यहां बच्चों का जोश और उत्साह देखने लायक था। शिक्षक बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में बता रहे थे और बच्चों ने भी बड़े मनोयोग से इस कार्यक्रम में भाग लिया। यह उत्सव न केवल बच्चों के लिए बल्कि शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायक था, क्योंकि यह अवसर बच्चों को शिक्षा की ओर आकर्षित करने का था।
पत्रिका व्यू
इस दिन के आयोजन में शासकीय स्कूलों में उत्साह और नीरसता दोनों का मिश्रण था। जहां कुछ स्कूलों में बच्चों की संख्या कम रही और उत्सव का प्रभाव फीका पड़ा, वहीं कुछ स्कूलों ने इसे बड़े धूमधाम से मनाया और बच्चों को उत्साहित किया। स्कूल स्तर पर बच्चों का स्वागत करने का यह कार्यक्रम एक सकारात्मक कदम था, लेकिन यह भी दिखाता है कि बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए और प्रयासों की जरूरत है। यह आयोजन न केवल बच्चों के उत्साह को बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि यह शिक्षकों के लिए भी एक प्रेरणा है कि वे बच्चों के बीच शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बना सकें। समग्र रूप से कहा जा सकता है कि शाला प्रवेशोत्सव का यह दिन मिश्रित परिणाम लेकर आया। जहां कुछ स्कूलों में यह आयोजन सफल रहा और बच्चों का उत्साह देखने को मिला, वहीं कुछ स्कूलों में उत्सव की शोभा फीकी रही। यह स्पष्ट है कि शिक्षा के प्रति बच्चों के मन में जागरूकता और उत्साह बढ़ाने के लिए इस तरह के आयोजनों का महत्व और बढ़ा दिया गया है।