जानकारी के अनुसार सेवर इलाके में रात को अज्ञात कारणों से एक दर्जन से अधिक चाय, अंडा, बर्गर-चाऊमीन एवं अन्य खाद्य पदार्थ की लकड़ी दुकानों में आग लग गई। आग ने धीरे-धीरे विकराल रूप धारण कर लिया। अचानक एक सिलेंडर फटा। इससे आस-पास के मकानों में सो रहे लोग भी बाहर निकल आए। कुछ देर में ही सूचना पर नागरिक सुरक्षा व अन्य एक दमकल पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। राहत कार्य के बीच में ही एक और सिलेंडर फटा। इससे बचाव दल को भी दूर से ही दमकल से काम करना पड़ा। आग पर काबू पाने में करीब दो घंटे से भी अधिक का समय लगा। सेवर पुलिस का कहना है कि सिलेंडर फटने की आवाज जरूर आई है, लेकिन फटने वाले सिलेंडरों की संख्या कितनी और कितना नुकसान हुआ है। उसका आंकलन बुधवार सुबह किया जाएगा। क्योंकि रात के समय आग पर काबू पाना ही बड़ा मुश्किल था। ऐसे में आंकलन भी नहीं किया जा सकता है।
पत्रिका ने चेताया, लेकिन अफसर लापरवाह
हकीकत यह है कि राजस्थान पत्रिका ने 27 मार्च 2025 के अंक में ही संभाग मुख्यालय…4 लाख की आबादी और आसपास के गांव, सिर्फ एक दमकल के भरोसे शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर सिस्टम की लापरवाही को उजागर कर दिया था। क्योंकि संभाग मुयालय पर शहर की आबादी करीब चार लाख से अधिक है, लेकिन इतनी बड़ी आबादी के लिए सिर्फ एक अग्निशमन वाहन है। अन्य अग्निशमन छह वाहन खराब पड़े है। ऐसी स्थिति में भीषण गर्मी में आग पर काबू पाना चुनौती से कम नहीं है। एक अग्निशमन वाहन है, वो भी दबाव के साथ पानी नहीं फेंक पाती है। अगर शहर में बड़ी आग लग जाए तो यहां प्रशासन के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। ऐसी स्थिति में अन्य कस्बे कुम्हेर, उच्चैन, नदबई व बयाना कस्बे से अग्निशमन के वाहन आग बुझाने के लिए बुलाए जाते है तब तक बहुत नुकसान हो जाता है।
अब अग्निशमन की जगह निगम की चाकरी
हकीकत तो यह है कि प्रशासन के पास आगजनी से बचाव के इंतजाम नाकाफी है। नगर निगम के अग्निशमन कार्यालय में अग्निशमन वाहनों की कमी तो है, लेकिन कई कर्मचारी नगर निगम में लगे हुए हैं व जो कर्मचारी अग्निशमन विभाग में लगे है उनको भी काम नहीं है। अग्निशमन कार्यालय में 21 कर्मचारी हैं जो आठ-आठ घंटे की ड्यूटी करते हैं। नगर निगम में अग्निशमन कार्यालय के तीन ड्राइवर व 10 फायरमैन नगर निगम कार्यालय में ड्यूटी कर रहे हैं। वहीं एक कर्मचारी अन्य कार्यालय में लगा है।
लोग बोले: लगता नहीं प्रशासन का रवैया ठीक
सेवर में आगजनी के बाद मकानों से बाहर निकले रेवतराम जाटव, नारायणलाल जाटव ने बताया कि भले ही प्रशासन ने दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया, लेकिन यह भी सोचनीय विषय है कि संभाग मुख्यालय होने के बाद भी दमकल तक पर्याप्त नहीं है। जबकि संभाग मुख्यालय होने के कारण व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए। नीरज चौधरी सेवर ने कहा कि जल्द जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर दमकल व अग्निशमन केंद्र को और बेहतर कराने की मांग की जाएगी।