सहमे रहे मवेशी, कई जीवों की मौत
आमदिनों की अपेक्षा प्रभावित क्षेत्र में मंगलवार को आवाजाही कम थी। प्रशासन की टीम व पुलिस क्षेत्र में घूमती नजर आई। गैस रिसाव के बाद क्षेत्र में फैले गैस के बवंडर ने मनुष्यों सहित पशु-पक्षियों को भी चपेट में ले लिया। चूहे, टिटहरी, श्वान सहित अन्य जीवों की गैस रिसाव के असर से दम घुटने के कारण मौत हो गई। घोंसला में महफूज बैठे परिंदे भी गैस के असर से अछूते नहीं रहे। सैकड़ों पक्षियों की मौत हो गई। क्षेत्रवासी अपने मवेशियों को उनके हाल पर छोड़कर निकल गए। इससे मवेशी सहमे रहे। मंगलवार दोपहर तक कई मवेशी पानी के लिए तड़पते रहे। जिनकी सार-संभाल करने कोई नहीं पहुंचा। पूर्व पार्षद हंसराज शर्मा ने बताया कि गैस के रिसाव के दौरान एकाएक हुए अंधेरे में कुछ नहीं सूझ रहा था। पुलिस व प्रशासन की टीम हिम्मत कर फैक्ट्री के अंदर तक पहुंची।
वापस आने का नहीं साहस
सादों का बाडिया क्षेत्र में गैस रिसाव के बाद 94 जनों की तबीयत बिगडने के बाद क्षेत्र के लोग इतना घबरा गए कि सोमवार रात को निकलने के बाद मंगलवार दोपहर तक अपने घरों पर नहीं पहुंचे। कइयों ने तो पूरी रात ही अस्पताल में काटी। प्रत्यक्षदर्शी उस भयानक मंजर को बताते हुए चुप्पी साधकर तेजाब फैक्ट्री की ओर देखने लगते हैं। मनोहरलाल कुमावत ने बताया कि गैस रिसाव की जानकारी मिलने पर लोग भागने लगे। कुछ ही देर में सादो का बाडिया खाली हो गए। जिनकी तबीयत खराब हो गई उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। यहां पर जिस तरह का काम हो रहा है जीवन के साथ खिलवाड है।पानी डालते ही तेज हुआ था रिसाव. . .
हेमसिंह ने बताया कि गैस रिसाव होने की जानकारी मिलते ही क्षेत्रवासी फैक्ट्री पहुंचे। उन्हें कुछ ही देर में फैक्ट्री बंद करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। पानी डालने के साथ ही गैस रिसाव तेज हो गया है। गीता ने बताया कि गैस रिसाव के बाद सीने में जलन हो रही है। दम घुटने जैसे हालात हो रहे हैं। गैस रिसाव के दौरान हर तरफ गैस का बवंडर था। कुछ भी नजर नहीं आ रहा था।रेफर करते ही मां की फूटी रुलाई
राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय में उपचाररत तेरह वर्षीय गणेश के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। गणेश को चिकित्सकों ने रिपोर्ट व एक्सरे की जांच के बाद उसे अजमेर रेफर करते ही उसकी मां की रुलाई फूट पड़ी।केमिकल फैक्ट्री मालिक समेत तीन ने तोड़ा दम, राह चलते लोगों को आई मौत
इनका कहना है…
गैस रिसाव वाले क्षेत्र में चार सदस्यीय टीम ने सर्वे किया था। क्षेत्र में चार श्वान की मौत हुई। पांच मवेशियों का उपचार किया है। पक्षियों के मरने की बडी संख्या सामने नहीं आई।-डॉ. गौतम गायकवाड, प्रभारी, बहुउदेश्यीय पशु चिकित्सालय