दरोगा ने जब यह आदेश न्यायालय में प्रस्तुत किया, तो जांच में इसे फर्जी पाया गया। इसके बाद इज्जतनगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने और पुलिस को गुमराह करने का मामला दर्ज किया है।
फर्जी आदेश से पुलिस को भटकाने की साजिश
गाजियाबाद के शालीमार गार्डन, शांतिनगर अपार्टमेंट निवासी विनोद अरोड़ा उर्फ रवि के खिलाफ करीब 15 साल पहले धोखाधड़ी और गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में स्पेशल गैंगस्टर कोर्ट (जज तबरेज अहमद) ने गैर-जमानती वारंट और कुर्की आदेश जारी किया था। इज्जतनगर थाने के दरोगा गुरदीप सिंह आदेश तामील कराने गाजियाबाद के पते पर पहुंचे, जहां मीनू शर्मा नाम की एक महिला मिली। उसने बताया कि 8 साल पहले उसने यह मकान विनोद से खरीद लिया था। जब मीनू के पति अमन शर्मा को विनोद के बारे में सूचना देने को कहा गया, तो विनोद को इसकी भनक लग गई। इसके बाद उसने दरोगा गुरदीप को व्हाट्सएप कॉल करके बताया कि उसने अदालत में हाजिर होकर वारंट रद्द करा लिया है।
आरोपी पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरु
विनोद ने दरोगा को दो फर्जी जमानत स्वीकृति आदेश व्हाट्सएप पर भेज दिए। दरोगा ने इन दस्तावेजों को रिपोर्ट के साथ न्यायालय में दाखिल कर दिया। जब कोर्ट ने इनकी सत्यता की जांच की, तो आदेश फर्जी निकले। न्यायालय ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए और विनोद के खिलाफ पुलिस व न्यायालय को गुमराह करने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। दरोगा गुरदीप की तहरीर पर इज्जतनगर थाने में विनोद अरोड़ा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।