हालांकि, नए ग्रुप को इसे पूरी तरह टेकओवर करने में लगभग छह महीने का समय लगेगा।
कर्मचारियों के हितों पर नहीं पड़ेगा असर
फैक्ट्री के बिकने से वहां कार्यरत 1380 स्थायी वर्कर्स और 700 स्थायी कर्मचारियों के हितों में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, लगभग 3000 दैनिक श्रमिक और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े 8000 से 10000 लोग इस उद्योग पर निर्भर हैं। सेंचुरी पेपर मिल की यूनियन श्रमिक कल्याण संघ के अध्यक्ष अवनीश त्यागी ने पुष्टि की है कि कर्मचारियों के हितों पर फिलहाल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि वर्तमान में त्रिवार्षिक एग्रीमेंट लागू है।
बिक्री को लेकर लंबे समय से चल रही थीं चर्चाएं
सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल को लेकर पिछले एक साल से इसके बिकने की चर्चाएं जोरों पर थीं। आखिरकार, 31 मार्च 2025 की शाम को इस पर विराम लग गया जब बिड़ला समूह ने अपने इस बड़े पेपर उद्योग को आईटीसी ग्रुप को बेचने की आधिकारिक घोषणा कर दी।
नई प्रबंधन नीति और सीएसआर फंड पर नजर
हालांकि, फैक्ट्री टेकओवर की प्रक्रिया दो से तीन चरणों में पूरी की जाएगी। साथ ही, सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल द्वारा स्थानीय स्तर पर चलाई जा रही कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड पॉलिसी पर आईटीसी ग्रुप का क्या रुख रहेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।