ये बातें स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडूराव ने कही। वे बुधवार को आर्टिस्ट फॉर हर, एचडीआर हेल्थकेयर फाउंडेशन, हेल्थ केयर सेक्टर स्किल काउंसिल, ईसीएचओ इंडिया, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, कर्नाटक स्टेट ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट एसोसिएशन की ओर से शहर के एक निजी होटल में सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन आंदोलन : जागरूकता से कार्रवाई तक कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, स्तन कैंसर के साथ-साथ सर्वाइकल कैंसर cervical cancer महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है और इससे मृत्यु भी होती है। हम भारत सरकार को सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में एचपीवी वैक्सीन HPV Vaccine को शामिल करने के लिए लिख रहे हैं। कुछ वर्ष पहले भारत सरकार ने आश्वासन दिया था कि वे पूरे देश में एचपीवी टीकाकरण अभियान चलाएंगे। लेकिन, यह अभी भी प्रक्रिया में है। हाल ही में संसद में भी टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाने की बात हुई।
सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ अचूक हथियार एचपीवी टीकाकरण सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ अचूक हथियार है। दुर्भाग्य से टीकाकरण अभियान पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है। ये सभी टीकाकरण और टीकाकरण कार्यक्रम आम तौर पर भारत सरकार के दायरे में हैं। इसके साथ ही कई प्रोटोकॉल भी हैं। दिल्ली, पंजाब और सिक्किम कुछ ऐसे राज्य हैं, जिन्होंने स्कूली बच्चों के लिए एचपीवी टीकाकरण शुरू किया है।
अभी तक इस पर कोई पहल नहीं केंद्र सरकार को टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करना चाहिए। लेकिन, केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर कोई पहल नहीं की है। इसलिए, राज्य सरकार ने इस वर्ष से इस परियोजना को शुरू करने का फैसला किया है और कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में 14 वर्षीय लड़कियों को नि:शुल्क एचपीवी टीकाकरण प्रदान करेगी। हर साल 14 साल की उम्र में ये टीके लगने शुरू हो जाएंगे। टीके की लागत कम होने के साथ वह दिन दूर नहीं जब इसे पूरे राज्य में और अधिक सार्वभौमिक बना दिया जाएगा।
सरकार प्रतिबद्ध मंत्री ने कहा कि सरकार वर्तमान में आर्टिस्ट फॉर हर और अन्य द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसमें टीकाकरण अभियान को चिक्कबल्लापुर जिले तक विस्तारित करने का प्रस्ताव है।
गले के कैंसर का भी कारण ओरल कैंसर विशेषज्ञ व सर्जन डॉ. यू. एस. विशाल राव ने कहा कि एचपीवी Human papillomavirus सर्वाइकल ही नहीं बल्कि गले के कैंसर का भी कारण बन रहा है। इस तरह के कैंसर के मरीजों में तेजी से वृद्धि हुई है। अगर हम अभी नहीं जागे तो बहुत देर हो जाएगा।
सबसे अधिक रोकथाम योग्य होने के बावजूद… अंतरराष्ट्रीय स्त्री रोग एवं प्रसूति संघ (फिगो) की वेल वूमेन हेल्थ केयर की डिवीजन डायरेक्टर डॉ. हेमा दिवाकर ने कहा कि सबसे अधिक रोकथाम योग्य होने के बावजूद सर्वाइकल कैंसर सबसे अधिक प्रचलित है। देशव्यापी प्रयासों के अतिरिक्त, सर्वाइकल कैंसर के बोझ को कम करने के लिए निरंतर सतर्कता, जागरूकता और सहयोगात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है।
एसोसिएशन ऑफ हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के अध्यक्ष डॉ. एलेक्स थॉमस ने भी अपने विचार साझा किए।