किसान इस रोग को अपनी भाषा में उगाला रोग कहते है। उखटा रोग लगने से पौधे की पत्तिया पीली पड़ रही है। कुछ दिन बाद पौधा पूरी तरह सूख जाता है। इसके कारण किसानों की नींद हराम हो गई है।
बढ़ा आर्थिक बोझ
किसान हनुमान बोहरा, यादराम दगोलिया, नेपाल चौधरी, प्रभु रैगर, मंगल सिंह,कमल चौधरी, नाथू लाल रैगर ने बताया कि देखते ही देखते हरे-भरे पौधे सूख रहे है। बाजार से महंगी कीटनाशक लाकर छिड़काव करने पर भी कोई राहत नहीं मिल रही है। चने की बुवाई में लागत अधिक आती है। महंगे दामों पर बीज मिलता है। इसके बाद कीटनाशक, खाद आदि में भी काफी रुपए खर्च होते हैं। ऐसे में यदि रोग लग जाए तो किसानों के सामने मुनाफा तो दूर लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
फसल गिरदावरी करवाने की मांग
पचेवर कस्बे समेत आवड़ा, नगर, सूरसागर, सैलसागर, मलिकपुर, किरावल, बरोल, क चौलिया, पारली, गुलाबपुरा, बनेडिया चारनान, राजपुराबास, अजीतपुरा, कुराड, आवड़ा इत्यादि गांवों में उखटा रोग का प्रकोप होने से किसान चिंता में डूब गए है। चने में रोग लगने से हरे-भरे खेत सूखे दिखाई देने लगे है। चने की फसल खेतों में ही सूखकर नष्ट हो रही है। किसानों ने इन क्षेत्रों में फसल की विशेष गिरदावरी करवाने की मांग की है। नहीं मिलते है कृषि अधिकारी
गौरतलब है कि संकट के समय में जानकारी प्राप्त करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में कृषि विभाग का कोई अधिकारी या कर्मी ग्रामीणों को नहीं मिलता है।हालांकि कस्बे में किसान सेवा केन्द्र बना हुआ है।लेकिन इनमें कृषि अधिकारी या कर्मी कब आते है। इसका किसी को अता-पता नहीं रहता है। अधिकारियों की कागजी समीक्षाओं की खानापूर्ति ने किसानों की हालत पतली कर दी है।