बेनीवाल ने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि संबंधित कंपनियों की ईसी की अनुपालना रिपोर्टों की भौतिक जांच केंद्रीय टीम को करनी चाहिए। दोनों कंपनियों ने किसानों को सही मुआवजा नहीं दिया। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिला, जिसके कारण वे आंदोलित है। उन्होंने भू-अवाप्ति की शर्तों की जांच करवाते हुए निष्पक्ष संस्थाओं से रिस्क एसेसमेंट एनालिसिस करवाते हुए पर्यावरण संबंधी संस्तुति की विवेचना तथा भविष्य में होने वाली पर्यावरण हानि के आंकलन से पूर्व दोनों प्लांटों की सभी गतिविधियां बंद करने की मांग की।
सांसद ने कहा कि चूंकि दोनों कंपनियों ने ईसी प्राप्त करने के लिए सरकार को जो प्री फिजीबिलिटी रिपोर्ट दी, उसमें रोजगार से जुड़े बिंदु की इन्होंने पालना तक नहीं की। साथ ही इनसे फैल रहे प्रदूषण से मानव, पशु धन के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। कृषि पर भी नकारात्मक असर होने लगा है। भूमि अवाप्ति पर मुआवजे के संदर्भ में निर्णयों व नियमों की अवेहलना कर रही है। गौरतलब है कि स्थानीय किसान दोनों कंपनियों के खिलाफ आंदोलित है और लगातार धरना भी चल रहा है।