CG News: निगम व टाउन एंड कंट्री से अनुमति नहीं ली..
पुलिस की जांच में चिमनी कांड को लेकर कई खुलासे सामने आए हैं। इसमें पता चला है कि चिमनी निर्माण प्रारंभ करने से पहले बालको कंपनी की ओर से
नगर निगम और नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से अनुमति नहीं ली गई। दोनों विभागों की अनुमति के बिना ही बालको कंपनी चिमनी का निर्माण करा रही थी। कायदे-कानून की अनदेखी कर बालको प्रबंधन ने 272 मीटर ऊंची चिमनी का निर्माण शुरू किया था।
यही नहीं बालको की ओर से चिमनी निर्माण का कार्य चालू करने से पहले
छत्तीसगढ़ भूमि विकास निगम की धारा 14 के अंतर्गत जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित हाई राइजिंग बिल्डिंग निर्माण के लिए भी अनुमति नहीं ली गई थी। इसका खुलासा कोर्ट के आर्डर शीट में किया गया है।
सुनवाई के दौरान
न्यायालय की ओर से पूछे गए प्रश्न में घटना की विवेचना करने वाले इंस्पेक्टर विवेक शर्मा ने बताया है कि जांच के दौरान बालको कंपनी की ओर से चिमनी निर्माण की अनुमति से संबंधित पूरे दस्तावेज पेश नहीं किए गए थे। बालको कंपनी और इससे जुड़ी सभी कंपनियों ने नियम-कायदों का उल्लंघन कर लापरवाही की।
निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों के नाम नहीं बताया
सुनवाई के दौरान न्यायालय की ओर से पूछा गया है कि चिमनी जब बन रही थी, तब बालको, सेपको, जीडीसीएल, बीवीआईएल और डीसीपीएल के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर, महाप्रबंधन एवं सीईओ कौन-कौन थे? जबकि चिमनी का निर्माण बालको कंपनी की जमीन पर किया जा रहा था।
बालको ने चिमनी निर्माण का कार्य सेप्को एवं जीडीसीएल के माध्यम से कराना शुरू किया था।
सवालों के घेरे में प्रशासन की भूमिका
बिना अनुमति चिमनी का निर्माण किया जा रहा था। इसके लिए कोरबा नगर निगम, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग,
छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम के अंतर्गत कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति से मंजूरी नहीं ली गई थी। यह चिमनी कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रही थी। कोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि जब चिमनी का निर्माण 250 मीटर (65 से 70 मंजिला आवासीय बिल्डिंग जितनी) हो गई थी, तो यह जिला प्रशासन को दिखाई नहीं दिया क्या?
चिमनी गिरने के बाद भी निगम लिख रहा था अनुमति लेने के लिए पत्र
इस चिमनी हादसे को लेकर एक और खुलासा सामने आया है। पता चला है कि चिमनी 23 सितंबर 2009 को जमीदोज हो गई। इसकी जांच अपराधिक प्रकरण दर्ज कर
पुलिस कर रही थी। तब भी नगर निगम की ओर से बालको को पत्र लिखकर यह कहा जा रहा था कि चिमनी निर्माण से संबंधित अनुमति ले लेवें। यह पत्र 2010 तक लिखा गया था।
पूर्व लोक अभियोजक रोहित राजवाड़े ने कहा की चिमनी दुर्घटना की जांच में पुलिस की ओर से लापरवाही की गई है। कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान विवेचक की लापरवाही सामने आई है। पुलिस की ओर से बालको, सेप्को, जीडीसीएल, बीवीआईएल और डीसीपीएल को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया? इस पर सवाल है।
लोक अभियोजक राजेंद्र साहू कहा की घटना के लिए जो लोग पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं, उन्हें आरोपी बनाने के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई गई थी। हमारी अर्जी को
न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि बालको सहित सभी पांच कंपनी को मुजरीम बनाया जाए। कोर्ट ने अगली तिथि पर उपस्थित होने के लिए कहा है।