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चैत्र नवरात्र विशेष: हर वर्ष बढ़ते हैं जवारा कलश, नेत्र रूप में हो रही मां कंकाली की अराधना

आस्था का केंद्र माई का धाम निगहरा, हो रहे विविध आयोजन, दर्शन करने उमड़ रही भोर से भीड़

कटनीApr 02, 2025 / 08:41 pm

balmeek pandey

Chaitra Navratri Special

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कटनी. समूचा जगत शक्ति की आराधना में लीन है। अलसुबह से मां के दरबार में जल अर्पित करने और आरती-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। चैत्र नवरात्र में कटनी जिले के ग्राम निगहरा स्थित मां कंकाली धाम में भक्तों की भारी भीड़ जुट रही है। यहां हर वर्ष जवारा कलश की संख्या बढऩे की अनूठी परंपरा देखने को मिलती है। गांव के शिवकुमार दुबे ने बताया कि नवरात्र के दौरान पहाड़ी पर नेत्र रूप में विराजीं मां कंकाली की आराधना विशेष रूप से की जाती है। उनकी कृपा से गांव के लोग सदियों से खुशहाली का जीवन जी रहे हैं। यहां की प्रमुख विशेषता यह है कि हर वर्ष जवारा कलश की संख्या बढ़ जाती है। गांव के प्रत्येक परिवार के श्रद्धालु कलश स्थापित कराते हैं। हर साल 500 से 700 कलश बोए जाते हैं, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से यह संख्या 3 से 5 कलश बढ़ जाती है।
श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिर की ओर उमड़ते हैं। 200 सीढिय़ां चढऩे के बाद भक्त मां के दर्शन कर पाते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि कुएं से मां कंकाली के प्रकट होने के बाद से ही यहां उनकी नेत्र रूप में आराधना की जाती है। कटनी से 20 किलोमीटर दूर बरही रोड पर स्थित इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि मां की कृपा से गांव पर कभी कोई बड़ा संकट नहीं आया। इसी आस्था के कारण यहां श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।
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ऐसे हुई मां कंकाली की स्थापना

गांव के विकास दुबे ने बताया कि मां कंकाली एक कुएं से प्रकट हुई थीं। वर्षों पहले एक ग्रामीण कुएं से पानी भर रहा था, तभी उसकी बाल्टी में एक पत्थर आ गया। यह कोई साधारण पत्थर नहीं था, बल्कि नेत्र के आकार का एक चमकता हुआ पत्थर था। रात में जब इसे घड़े में रखा गया तो गडगड़ाहट की आवाजें आने लगीं। अगले दिन गांव के पुजारी को मां कंकाली ने स्वप्न में आदेश दिया कि मेरी स्थापना पहाड़ पर की जाए। इस चमत्कार के बाद ग्रामीणों ने विधि-विधान से मंदिर की स्थापना कराई।

81 वर्ष से अधिक पुराना है मंदिर

मंदिर के इतिहास के बारे में विजय दुबे, सुशील दुबे और पुजारी भक्ति राठौर ने बताया कि करीब 81 साल पहले यहां एक छोटी मढयि़ा थी, जहां पूजा होती थी। धीरे-धीरे ग्रामीणों के सहयोग से पहाड़ में सीढिय़ां बनाई गईं और मंदिर का भव्य निर्माण हुआ। नवरात्र के दौरान यहां जवारा कलश और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। निगहरा गांव और आसपास के ग्रामीण अंचलों के श्रद्धालु पैदल यात्रा कर जल अर्पण करने आते हैं। मनौती पूरी होने के कारण हर साल यहां कलशों की संख्या बढ़ती रहती है। यह आस्था का ऐसा केंद्र है, जहां भक्त शक्ति की कृपा पाने के लिए दूर-दूर से आते हैं और मां कंकाली का आशीर्वाद लेकर जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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