सीइओ ने भी जाहिर की चिंता
इस दौरान छात्राओं को बेहतर तरीके से पढऩे व शिक्षकों को भी ठीक से पढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। भविष्य से भेंट कार्यक्रम में जिला पंचायत सीइओ (आइएएस) शिशिर गेमावत ने छात्राओं के शैक्षणिक स्तर पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति तो नहीं होनी चाहिए। शिक्षक बेहतर तरीके से अभी से पढ़ाना शुरू करें। इस दौरान उपायुक्त पवन अहिरवार सहित शिक्षक मौजूद रहे।जिलेभर के हैं यही हाल
बता दें कि बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता किसी से छिपी नहीं है। कक्षा 5 व 8 का परिणाम भले ही 90 प्लस है, लेकिन बोर्ड के आने वाले परिणाम हकीकत बयां करते हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी, दूसरा शिक्षकों का सिर्फ सरकारी नौकरी करना, मन लगाकर न पढ़ाना, अफसरों द्वारा भी सालभर निगरानी न करने के कारण शिक्षा का स्तर नहीं सुधर रहा। अफसर यदा-कदा स्कूलों की नब्ज टटोलते हैं, जिससे ऐसे हालात बनते हैं। वहीं दूसरी ओर शासकीय में मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है, जिसको लेकर कलेक्टर ने कहा कि सभी जगह इंतजाम हैं, यदि कहीं पर समस्या होगी तो उसे दिखवाया जाएगा।
अधिकांश स्कूलों में नहीं लागू हुईं एनसीइआरटी की पुस्तकें
शैक्षणिक सत्र 2025-26 की शुरुआत हो चुकी है। अभिभावकों ने कॉपी, किताब, स्टेशनरी, यूनीफॉर्म आदि में जेबें ढीली कर चुके हैं। पाठ्यपुस्तक विक्रेताओं द्वारा मनमाने तरीके से पाठ्स सामग्री बेची जा रही है। हैरानी की बात तो यह है कि निजी स्कूलों में सरकार के नियमों का अक्षरसा पालन ही नहीं हो रहा। कई स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एनसीइआरटी की पुस्तकें तो लागू हो गई हैं, लेकिन अभी भी अधिकांश स्कूल निजी पब्लिकेशन की मनमाने दाम वाली पुस्तकें चला रहे हैं, जिससे अभिभावकों को 5 से 7 हजार रुपए का खर्च आ रहा है। 90 फीसदी से अधिक अधिवभाकों ने खरीदी कर ली है, लेकिन शिक्षा विभाग व प्रशासन के अधिकारियों ने जांच-कार्रवाई की अबतक कोई जहमत नहीं उठाई। फीस को लेकर भी गाइड लाइन का पालन नहीं हो रहा। इसके अलावा पूर्व के वर्ष में अभिभावकों को राहत दिलाने के लिए प्रशासन द्वारा साधुराम स्कूल में पुस्तक मेले का आयोजन किया गया था, लेकिन इस साल अबतक कोई पहल नहीं की गई। जब अधिकांश अभिभावकों ने खरीदी कर ली है, तब जाकर अब पुस्तक लगाने की बात प्रशासन कह रहा है।