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कांकेर

Mahashivratri 2025: 2 टुकड़ों में बंटा पहाड़… एक में 12 ज्योतिर्लिंग तो दूसरे में शिव विराजमान, दर्शन करने लगा भक्तों का तांता

Mahashivratri 2025: दुधावा अंचल में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और आस्था से मनाया गया। शिव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी।

कांकेरFeb 27, 2025 / 01:17 pm

Laxmi Vishwakarma

Mahashivratri 2025: 2 टुकड़ों में बंटा पहाड़... एक में 12 ज्योतिर्लिंग तो दूसरे में शिव विराजमान, दर्शन करने लगा भक्तों का तांता
Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर खड़ेश्वर महादेव के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु चेमल स्थित खंडी घाट पहुंचे। दुर्गुकोंदल मार्ग पर गुलालबोड़ी से पश्चिम दिशा में चेमल ग्राम और वहां से 3 किलोमीटर दूर स्थित खंडी घाट का धार्मिक और प्राकृतिक महत्व है। यहां आने के लिए श्रद्धालुओं को खंडी नदी को पार करना पड़ता है। इस स्थल की पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मान्यता इसे एक प्रमुख तीर्थ स्थल बनाती है।

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Mahashivratri 2025: महाभारत काल से जुड़ा है यहां का इतिहास

खंडी घाट क्षेत्र वन परिक्षेत्र दुर्गुकोंदल के उपपरिक्षेत्र में आता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। खंडी घाट की पहाड़ी पर विशाल वृक्ष और झाड़ियों के बीच कई दुर्लभ जड़ी-बूटियां और वनस्पतियां पाई जाती हैं। इस जगह का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। इसे द्वापर युग में शांतेश्वर नामक राजा द्वारा शासित माना जाता है।
खंडी घाट के बारे में मान्यता है कि यहां के तीन पत्थरों पर भीम सेन ने प्रहार किया था। इसके बाद खंडी घाट दो भागों में विभक्त हो गया। एक भाग में सिद्धेश्वर महादेव, माया मोहिनी, योगी गुफा, और बारह ज्योतिर्लिंग शिवालय स्थित हैं। जबकि, दूसरे भाग में भगवान शिव, माता दुर्गा, माता पार्वती, गणेशजी और हनुमानजी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां हर नवरात्रि ज्योति कलश प्रज्जवलित की जाती है। दर्शन करने के लिए यहां सालभर श्रद्धालु आते रहते हैं।

दुधावा अंचल में महाशिवरात्रि का पर्व…

दुधावा अंचल में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और आस्था से मनाया गया। शिव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। दुधावा स्थित शिव मंदिर, दुध्देश्वर शिव मंदिर, कबीर मंदिर और कृष्ण राधा मंदिर में बड़ी संख्या में लोगों ने पूजा-अर्चना की।
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श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, फूल, दूध, दही, शहद आदि अर्पित किए। इस दौरान मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही। भक्तों ने पूरी श्रद्धा से पूजा की। शिव की महिमा का बखान किया। बरकई गांव के भीमा महादेव मंदिर में भी सुबह 4 बजे से भक्तों का तांता लगा रहा।
यहां श्रद्धालुओं ने महानदी से जल लेकर भगवान शिव को अर्पित किया। ऊं नम शिवाय, हर हर महादेव के उद्घोष से मंदिर गूंज उठा। इस मौके पर नवनिर्वाचित सरपंच संगीता मरकाम, चंद्रिका पोटाई, रंगलता पाल, सीमा यादव और नीरा पटेल ने भी श्रद्धालुओं के साथ पूजा अर्चना की।

बुढ़ेश्वर महादेव के मंदिर में गूंजे आस्था के स्वर

Mahashivratri 2025: सरोना में महाशिवरात्रि पर बुढ़ेश्वर महादेव मंदिर मुड़पार में श्रद्धालुओं ने हवन-पूजन का आयोजन किया। भक्तों ने महानदी में स्नान के बाद शिवालयों में जलाभिषेक किया। इस दौरान शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा फूल, बेरफल, और जामुन फल अर्पित किए गए। भक्तों के हर हर महादेव, बम बम भोले जैसे जयकारों से शिवालय गूंज उठे। बुढ़ेश्वर महादेव मंदिर में विशेष आयोजन हुआ।
यहां सभी शिव भक्तों ने हवन-पूजन किया। स्व. नोहर सिंह नेताम की स्मृति में नेताम परिवार ने प्रसाद स्वरूप खिचड़ी बांटी। मंदिर में खीर-पुरी का महाभंडारा भी हुआ। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में पुजारी शिवचरन वट्टी, गैंद पटेल, संतोष नागराज, गैतराम रामटेके, कमल ध्रुवा समारु वट्टी, गंगा राम शोरी, शाम सिंह कोड़ोपी आदि मौजूद रहे।

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