शिव चतुर्दशी तिथि
मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। जो बुधवार को सुबह 11 बजकर 6 मिनट से पूरे दिन रात रहेगी। महाशिवरात्रि पर चतुर्दशी तिथि प्रदोष व्यापिनी के साथ रात्रि निशीथ काल में रहनी चाहिए जो इस बार पूरे दिन रात रहेगी।
भोले के भक्त रखेंगे उपवास
महाशिवरात्रि के दिन भोले के भक्त दिनभर उपवास रखेंगे। सुबह से लेकर शाम तक भगवान आशुतोष का दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाएगा। शिवजी को पंचामृत से नहलाकर गंगाजल अर्पण किया जाएगा। धतूरा आक के पुष्प, गाजर बिल्वपत्र आदि चढ़कर भगवान का श्रृंगार किया जाएगा। महाशिवरात्रि के दिन भगवान का पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय का विशेष रूप से जाप किया जाएगा। अनेक जगह मंगलवार को जागरण हुए। कई जगह बुधवार को भी जागरण होंगे। झांकियां सजाई जाएगी।
4 प्रहर का पूजन समय
प्रथम प्रहर- सायंकाल 6:22 से रात्रि 9:30 बजे तक द्वितीय प्रहर- रात्रि 9:31 से रात्रि 12:39 बजे तक तृतीय प्रहर- मध्यरात्रि 12:40 से 3:48 बजे तक चतुर्थ प्रहर- मध्यरात्रि बाद 3:49 से प्रातः 6:57 बजे तक निशीथ काल – मध्यरात्रि 12:15 से 1:05 बजे तक।