पीजी उत्तीर्ण चिकित्सकों का कहना है कि पूर्व में आवेदन के समय पीजी के लिए करीब 6 माह से अधिक समय शेष था। पीजी करते हुए वो चिकित्सा अधिकारी पद पर ज्वॉइन नहीं कर सकते थे। जबकि सरकार दिसंबर में ही पद पर ज्वॉइन कराने की तैयारी में थी। ऐसे में उन्होंने आवेदन नहीं किया। अब बार-बार चिकित्सा अधिकारी परीक्षा स्थगित होने से संशोधित विज्ञप्ति जारी की गई है और उनकी पीजी भी पूर्ण हो गई है। ऐसे में उनको नियमानुसार आवेदन की अनुमति दी जानी चाहिए।
उनका आरोप है कि ऐसा नहीं करके भर्ती एजेंसी राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) उनके हितों से खिलवाड़ कर रहा है। इस मामले में कुलपति से भी नियम बदलने और ऑनलाइन पोर्टल खोलकर त्रुटि सुधार का अवसर देने की मांग की गई है। इन चिकित्सकों ने कहा कि प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टर की लगातार कमी बनी हुई है। ऐसे में पीजी किए हुए छात्रों को परीक्षा से वंचित करना ठीक नहीं है।