कौन है इस रणनीति के पीछे
चर्चा है कि बिजली महकमा एक बड़े अफसर के इर्द-गिर्द घूम रहा है। उन्होंने अन्य अफसरों को विश्वास में ले रखा है, ताकि उनके काम में कोई अड़ंगा नहीं लगा पाए। लगातार दिल्ली के भी चक्कर लग रहे हैं। इस 22 करोड़ के काम के पीछे भी इन्हीं अफसरों की रणनीति मानी जा रही है। बिजली महकमे के कर्मियों में इस बात पर ज्यादा चर्चा है।ये भी काम करेगी कंपनी
• छह बिजली कंपनियों का डेश बोर्ड और डिजिटल वॉर रूम का सेटअप• प्रबंधन की कार्य क्षमता बढ़ाने का तरीका, नेटवर्किंग
• विद्युत क्षेत्र में सुधार से जुड़ा प्लान व डिजाइन तैयार करना
• केन्द्र सरकार के उपक्रमों के साथ हुए जॉइंट वेंचर को डिजाइन करना
• थर्मल पावर प्लांट संचालन के लिए अनुबंध, प्रसारण तंत्र का सुदृढ़ीकरण
• बैटरी स्टोरेज प्लांट और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में पहल
सवाल जो उठ रहे
■ अनुबंध में जितने काम शामिल किए गए हैं. उनमें से ज्यादातर काम मौजूदा अफसर कर रहे हैं। इनमें ऐसा कौन सा काम है, जो बिजली कंपनियां व ऊर्जा विभाग की टीम नहीं कर सकती?■ इन बिजली कंपनियों में 3 सीएमडी, 6 प्रबंध निदेशक, 8 तकनीकी निदेशक, 6 वित्त निदेशक के अलावा चार दर्जन से ज्यादा मुख्य अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता है। इन्हें 30 से 35 साल का अनुभव है। क्या इन अफसरों पर भरोसा नहीं हैं?
■ कंपनियों ने 28 हजार करोड़ की पुनरोद्धार वितरण क्षेत्र योजना के तहत केन्द्र सरकार को बिजली तंत्र में सुधार का पूरा प्लान भेजा हुआ है, तो फिर इसमें अलग से क्या काम होगा? क्या केन्द्र को भेजे प्लान में खामी रह गई?
■ बिजली की चोरी व छीजत में लगातार कमी होने का दावा करते हैं, यानी अफसरों की परफेक्ट प्लानिंग है। क्या ये आंकड़े गलत हैं?
■ अफसरों ने सुधार की जो रिपोर्ट प्रबंधन को सौंपी हुई, उसका क्या हुआ?