हालांकि, आमला नगर में कई निजी स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षक-शिक्षिकाएं इस अनिवार्यता को पूरा नहीं करते। ऐसे में निजी स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके बावजूद, शिक्षा विभाग के अधिकारी निजी स्कूलों की जांच करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
शिक्षकों के लिए योग्यता अनिवार्य
अधिकतर निजी विद्यालयों में डीएड-बीएड योग्यता प्राप्त शिक्षकों की अनिवार्यता का पालन नहीं किया जा रहा है, जो कि शासन के नियमों का उल्लंघन है। इस नियम के प्रभावी होने से निजी स्कूलों में बिना बीएड-डीएड किए पढ़ा रहे शिक्षक प्रभावित होंगे और 1 अप्रैल से वे कहीं भी पढ़ाने योग्य नहीं रहेंगे। सरकारी स्कूलों में पहले से ही संविदा शिक्षकों के लिए डीएड अथवा बीएड अनिवार्य है, इसलिए वहां इस नियम का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
स्वयं की भूमि और खेल मैदान की अनिवार्यता
शिक्षकों की योग्यता के साथ-साथ निजी विद्यालयों में स्वयं की भूमि और खेल ग्राउंड की अनिवार्यता का भी पालन नहीं किया जा रहा है। यह भी शासन के नियमों का उल्लंघन है। आमला में कुल 56 निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें से अधिकांश स्कूल शासन के नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं। यह ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी और कार्रवाई
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे निजी स्कूलों की जांच करें और नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों पर उचित कार्रवाई करें। विकासखंड स्त्रोत समन्वयक, जनपद शिक्षा केंद्र आमला, मनीष घोटे का कहना है कि निजी स्कूलों में डीएड-बीएड शासन के नियम अनुसार अनिवार्य है। यदि किसी स्कूल में शिक्षक-शिक्षिकाएं डीएड-बीएड योग्य नहीं हैं, तो उन्हें कुछ समय दिया जाता है। समय सीमा समाप्त होने के बाद भी यदि स्कूल में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस नियम का सख्ती से पालन किया जाना आवश्यक है, जिससे विद्यार्थियों को योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों से शिक्षा प्राप्त हो सके।